डायबिटीज क्या है ? डायबिटीज के घरेलू उपचार, लक्षण, कारण व प्रकार। Diabetes in Hindi

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मधुमेह जिसे अंग्रेजी में डायबिटीज (Diabetes) कहा जाता है, चयापचयी (metabolism) संबंधित बीमारियों का एक ऐसा समूह है जिसमें लम्बे समय तक खून में शर्करा (Sugar) की मात्रा का स्तर अधिक रहता है । इसलिए इसे शुगर की बीमारी (sugar disease) भी कहा जाता है।

यह एक ऐसी बीमारी है जिसमे रक्त में शर्करा (glucose) का लेवल बढ़ जाता है । यदि इसको नियंत्रित नही किया गया तो शरीर में कई प्रकार की समस्याएं पैदा हो जाती है जैसे – अधिक भूख लगना, बार-बार पेशाब आना, अधिक प्यास लगना, थकान महसूस होना आदि ।

डायबिटीज या शुगर की बीमारी के कारण शरीर में अग्न्याशय (Pancreas) पर्याप्त मात्रा में इन्सुलिन हार्मोन (Insulin hormones) का निर्माण नहीं कर पाता है या इन्सुलिन का निर्माण तो हो पाता है किन्तु शरीर की कोशिकाएं ठीक प्रकार से इन्सुलिन हार्मोन को प्रतिक्रिया नहीं देती है क्यूंकि शर्करा (Glucose) को कोशिकाओं तक पहुँचाने का कार्य इंसुलिन का होता है ।

इस प्रकार जब इन्सुलिन हार्मोन का निर्माण ही नहीं होगा तो शर्करा कोशिकाओं तक नहीं पहुँच पायेगी तथा इसकी मात्रा रक्त में बढ़ जाएगी ।

आज के समय में शुगर की बीमारी या मधुमेह होना बहुत ही आम बात हो गई है । आजकल यह बीमारी अधिक उम्र के लोगों में ही नहीं बल्कि छोटे बच्चों में भी होने लगी है । पहले के समय में इस बीमारी की चपेट में सिर्फ अधिक उम्र के लोग (40 से 50 आयु वाले) ही आते थे । यह बीमारी आजकल के अनुचित खानपान, जीवनशैली आदि के कारण उत्पन्न होती है ।

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º मधुमेह क्या होती है ? (What is Diabetes in Hindi) 

Diabetes insulin
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Sugar ki bimari kya hai ? Diabetes Kya hoti hai ?

जब हम भोजन करते हैं तो शरीर में इसका पाचन होता है उसके बाद यह छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटकर ग्लूकोस अर्थात शर्करा में परिवर्तित हो जाता है । शर्करा से ही हमारे शरीर को शक्ति (Energy) मिलती है । शर्करा इन्सुलिन हार्मोन के माध्यम से रक्त से होकर शरीर की प्रत्येक कोशिका तक तक पहुंचाई जाती है ।

किन्तु जब इन्सुलिन हार्मोन की शरीर में कमी आ जाती है या इन्सुलिन का निर्माण हमारे शरीर में नही हो पाता है तो शर्करा (Glucose) रक्त में एकत्रित होने लगती है तथा रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है । इसे ही मधुमेह या डायबिटीज (Diabetes) कहा जाता है । रक्त में शुगर लेवल या शर्करा बढ़ने के कारण इसे शुगर की बीमारी (Sugar disease) भी कहते हैं ।

डायबिटीज को आयुर्वेद में मधुमेह कहा जाता है । आयुर्वेद के अनुसार यह रोग त्रिदोष अर्थात तीनों दोषों – वात, पित्त और कफ के असंतुलित हो जाने के कारण उत्पन्न होता है किन्तु प्रमुख रूप से कफ दोष अधिक प्रभावित होता है ।

º मधुमेह के लक्षण (Symptoms of Diabetes in Hindi)

diabetes ke lakshan in hindi 

शुगर की बीमारी या मधुमेह के निम्नलिखित लक्षण है –

  • घाव न भरना – जब शरीर में चोट लग जाती है तथा घाव बन जाता है तो वह ठीक नहीं होता है या ठीक होने में समय लगता है ।
  • अधिक भूख एवं प्यास लगना
  • शरीर का वजन कम होना 
  • बार-बार पेशाब (Urine) आना
  • बार-बार प्यास लगना 
  • हमशा थका हुआ महसूस करना
  • आँखों से धुंधला दिखाई देना
  • प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर पड़ना जिसके कारण शरीर बाहरी संक्रमण के प्रति संवेदनशील  हो जाता है ।
  • रक्त में अधिक शक्कर के कारण तंत्रिका तंत्र क्षतिग्रस्त हो सकता है जिसके कारण हाथ-पैरों में झनझनाहट होने लगती है ।
  • अधिक पेशाब आने के कारण शरीर में निर्जलीकरण की समस्या उत्पन्न हो जाती है तथा मुंह एवं गला सूख जाता है ।
  • त्वचा सम्बन्धी समस्याएं उत्पन्न होना जैसे-खुजली होना आदि ।
  • उल्टी करने की इच्छा होना
  • स्त्रियों की योनि में प्राय: कैंडिड इन्फेक्शन या यीस्ट इन्फेक्शन (candida infection or yeast infection) होने का खतरा होता है ।
  • मसूड़ों (Gum) का संक्रमण होना जिसके कारण मसूड़े कमजोर हो सकते है तथा दांत ढीले हो सकते है ।

इनके अतिरिक्त सिरदर्द होना, ह्रदय की धड़कन बढ़ना, प्रतिरक्षा तंत्र का कमजोर होना आदि मधुमेह के आरंभिक लक्षण हो सकते हैं ।

º मधुमेह के प्रकार (Types of Diabetes in Hindi)

Diabetes kitne prakar ka hota hai ? Diabetes ke prakar in hindi 

शुगर की बीमारी या मधुमेह तीन प्रकार की होती है –

टाइप-1 मधुमेह (Type-1 Diabetes)

इस प्रकार के मधुमेह में हमारे शरीर में अग्न्याशय (Pancrease) इन्सुलिन का निर्माण नहीं कर पता है । यह समस्या तब आती है जब किसी रोगी का प्रतिरक्षा तंत्र गलती से अग्न्याशय की इन्सुलिन उत्पादक बीटा कोशिकाओं (β-cells/Beta cells) पर आक्रमण करती है तथा उनको नष्ट कर देती है जिसके कारण अग्न्याशय में इन्सुलिन हार्मोन का निर्माण नहीं हो पता है।

कुछ व्यक्तियों में type-1 डायबिटीज का जींस (Gens) भी कारण  हो सकते हैं । इस प्रकार के मधुमेह की समस्या सामान्य तौर बच्चों एवं युवाओं में देखी जा सकती है हालाँकि यह बीमारी किसी भी आयु वाले व्यक्ति को हो सकती है । टाइप-1 डायबिटीज से ग्रस्त व्यक्ति को जीवित रहने के लिए प्रतिदिन इन्सुलिन लेना पड़ता है ।

टाइप-2 मधुमेह (Type-2 Diabetes)

यह रोग इन्सुलिन प्रतिरोध (Resistance) के कारण होता है । टाइप-2 डायबिटीज में या तो शरीर में इन्सुलिन का निर्माण नहीं हो पाता है या इन्सुलिन का निर्माण तो होता है किन्तु शरीर कोशिकाएं इन्सुलिन का उपयोग नहीं करती है अर्थात कोशिकाएं इन्सुलिन के प्रति प्रतिरोधी हो जाती है । यह रोग किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है किन्तु अधिकतर मध्यम आयुवर्ग या वृद्ध लोगो को होता है ।

गर्भावस्थाजन्य मधुमेह (Gestational Diabetes)

जैसा की इसके नाम से ही स्पष्ट है कि यह रोग प्रेगनेंसी से सम्बंधित है । इस रोग का प्रमुख कारण गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल परिवर्तन है । गर्भावस्था के समय नाल हार्मोन का उत्पादन होता है जो इन्सुलिन को कोशिकाओं के प्रति कम संवेदनशील बनाती है

जिसके कारण रक्त में शर्करा की मात्रा बढ़ जाती है । जेस्टेशनल डायबिटीज के बाद स्त्रियों में टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा बढ़ जाता है ।

º मधुमेह के कारण (Causes of Diabetes in Hindi)

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Diabetes hone ka kya karan hai ? Diabetes ke karan in hindi 

टाइप-1 मधुमेह होने के कारण (Causes of Type-1 Diabetes in Hindi)

टाइप-1 डायबिटीज होने का प्रमुख कारण इन्सुलिन हार्मोन का निर्माण नहीं हो पाना है । इसमें अग्न्याशय में इन्सुलिन का उत्पादन करने वाली बीटा कोशिकाओं पर गलती से प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) आक्रमण करती है जिसके कारण इन्सुलिन का निर्माण नहीं हो पाता है ।

इसके अतिरिक्त कुछ रोगियों में टाइप-1 डायबिटीज होने का कारण जीन भी हो सकते हैं ।

टाइप-2 मधुमेह होने के कारण (Causes of Type-2 Diabetes in Hindi)

टाइप-2 डायबिटीज होने का प्रमुख कारण शरीर की कोशिकाओं द्वारा इन्सुलिन का प्रतिरोध है । इसमें अग्न्याशय में इन्सुलिन का निर्माण तो होता है किन्तु शरीर की कोशिकाएं इन्सुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं होती बल्कि इन्सुलिन का प्रतिरोध करती है । इस प्रकार इन्सुलिन का उपयोग नहीं होता है ।

इसके अतिरिक्त डायबिटीज होने के निम्नलिखित कारण होते हैं –

  1. जेस्टेशनल डायबिटीज का प्रमुख कारण गर्भावस्था के समय नाल हार्मोन का उत्पादन होना है जो इन्सुलिन हार्मोन को कोशिकाओं के प्रति कम संवेदनशील बनाती है । 
  2. मोटापा – जो लोग मोटापे से ग्रस्त है उनको भी ब्लड शुगर की समस्या आ सकती है ।
  3. यदि आप व्यायाम (Excercise) नहीं करते और आपका वजन आपकी उम्र के हिसाब से अधिक बढ़ा हुआ है तो भी आपको डायबिटीज की बीमारी हो सकती है ।
  4. यदि आपको हाई बीपी की समस्या है तथा आपका कॉलेस्ट्रॉल भी संतुलित नहीं रहता है तो भी डायबिटीज की समस्या आ सकती है ।

º मधुमेह से बचाव (Prevention of Diabetes in Hindi) 

Diabetes se kaise bachen ? डायबिटीज से कैसे बचें ? Diabetes se bachav in hindi 

आधुनिक जीवनशैली में डायबिटीज के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है । हमारे शरीर को सबसे अधिक ऊर्जा शुगर या मंड (Starch) से ही मिलती है किन्तु जब शरीर में इन्सुलिन हार्मोन की कमी हो जाती है तो शुगर ऊर्जा में परिवर्तित होने की बजाय रक्त में इकठ्ठा होने लगती है जो डायबिटीज का कारण बनती है ।

डायबिटीज से बचाव के उपाय निम्नलिखित है –

  • वजन सामान्य रखें – डायबिटीज से बचने के लिए आप अपना वजन अपनी उम्र के अनुसार सामान्य रखें ।
  • प्रतिदिन व्यायाम करें – प्रतिदिन कम से कम आधा घंटा व्यायाम करें इससे डायबिटीज होने का खतरा टल सकता है ।
  • पर्याप्त पानी पियें – डायबिटीज से बचने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए ।
  • आहार में फाइबर का सेवन करें – फाइबर आपके आहार का आवश्यक भाग होता है । यह भोजन को पचाने में मदद करता है तथा शुगर लेवल को भी कण्ट्रोल करता है ।
  • धूम्रपान एवं शराब का सेवन न करें ।
  • भोजन करने के तरीके को नियंत्रित करे तथा कम एवं संतुलित आहार का सेवन करें ।
  • हमेशा तनाव से दूर रहें ।

º मधुमेह के परीक्षण (Tests for Diabetes in Hindi)

डायबिटीज का टेस्ट कैसे होता है ? diabetes ka test kaise hota hai ?

भोजन करने से पहले एक स्वस्थ व्यक्ति का ब्लड शुगर लेवल 100 mg/dl या उससे कम होना चाहिए और भोजन करने से पहले डायबिटिक (Diabetic) का शुगर लेवल 80-130 mg/dl तक होना चाहिए ।

वहीं भोजन करने के २ से ढाई घंटे बाद स्वस्थ व्यक्ति का शुगर लेवल 140 mg/dl से कम होना चाहिए और भोजन करने के बाद डायबिटिक का ब्लड शुगर लेवल 180 mg/dl से कम होना चाहिए ।

आपको शुगर है या नहीं इसका टेस्ट निम्नलिखित प्रकार से किया जा सकता है –

खाली पेट ब्लड शुगर टेस्ट (Fasting Blood Sugar test)

खाली पेट रक्त शर्करा परिक्षण करने के लिए आपको कम से कम सात से आठ घंटे कुछ नहीं खाना होता है । उसके बाद आपका पहला ब्लड टेस्ट होता है । इस टेस्ट में यदि आपका रक्त शर्करा स्तर (Blood sugar leval) 130 mg/dl से अधिक होता है तो आपको मधुमेह हो सकता है ।

भोजन करने के बाद रक्त शर्करा परिक्षण (postprandial blood sugar test)

यह टेस्ट शुगर के निदान (Diagnosis) के लिए नहीं किया जाता है । इस टेस्ट को इसलिए किया जाता है कि डायबिटीज का रोगी भोजन के साथ-साथ सही मात्रा में इन्सुलिन का सेवन कर रहा है या नहीं ।

यह टेस्ट भोजन करने के लगभग २ घंटे बाद किया जाता है । अगर ब्लड शुगर लेवल का परिणाम २०० mg/dl से अधिक आता है तो आपको डायबिटीज हो सकता है ।

हीमोग्लोबिन ए1सी परिक्षण (hemoglobin a1c test) 

इस प्रकार के टेस्ट में यह ज्ञात किया जाता है कि आपकी लाल रक्त कोशिकाओं शर्करा या शुगर की मात्रा कितनी है । इस टेस्ट की मदद से आप यह जाँच कर सकते हैं कि पिछले दो या तीन माह में आपकी डायबिटीज कितनी नियंत्रित हुई है और आपको मेडिसिन बदलने की आवश्यकता है या नहीं ।

हीमोग्लोबिन ए1सी (HbA1c test) टेस्ट में यदि ब्लड शुगर लेवल 6.5 % या उससे अधिक आती है तो आपको हाई ब्लड शुगर हो सकता है ।

यदि भोजन करने से पहले ब्लड शुगर टेस्ट 100-130 mg/dl  के बीच हो या भोजन करने के बाद रक्त शर्करा परिक्षण का परिणाम 140-200 mg/dl के बीच है अथवा हीमोग्लोबिन ए1सी टेस्ट का परिणाम 5.7 % से  6.4 % के बीच है तो आपको प्री-डायबिटीज हो सकता है । 

º मधुमेह के घरेलू उपचार (Home remedies for Diabetes in Hindi)

Diabetes ke gharelu upchar in Hindi   sugar ki bimari ke gharelu nuskhe

यदि आपको शुगर के लक्षण दिखाई दे रहें हैं तो तुरंत अपना टेस्ट करवाएं तथा नीचे दिए गए घरेलू उपचारों को अपनाएं । अगर घरेलू उपायों से भी शुगर कण्ट्रोल नहीं होता है तो किसी अच्छे डॉक्टर की सलाह लें –

नीम के पत्तों (Neem leaves) का रस पियें  

neem for diabetes
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शुगर कण्ट्रोल करने के लिए नीम सबसे बेस्ट उपाय है । नीम के पत्तों में इन्सुलिन रेसेप्टन सेंसिटिविटी बढ़ाने का गुण तो पाया जाता ही है किन्तु उसके साथ-साथ यह शुगर की एलॉपथी दवाइयों पर निर्भर होने से भी बचाता है और नसों में रक्त प्रवाह को भी सही तरीके से चलने में मदद करता है । इसलिए प्रतिदिन सुबह खाली पेट नीम के पत्तों का जूस पिए ।

करेला के जूस (bitter gourd juice) का सेवन करें 

जिन लोगों को मधुमेह या डायबिटीज की समस्या है वो करेले का जूस का सेवन करें । करेले का रस ब्लड से शुगर को कम करने में मदद करता है । इसलिए प्रतिदिन करेले के रस का सेवन करना चाहिए ।

आंवले के रस (Amla juice) का सेवन करें

Amla for madhumeh
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डायबिटीज को कम करने के लिए आंवले का भी प्रयोग किया जाता है । आंवले के रस में थोड़ी से हल्दी मिलाकर प्रतिदिन दिन में तीन बार सेवन करने से डायबिटीज के लक्षणों से छुटकारा पाया जा सकता है ।

तुलसी (Tulsi) का सेवन करें 

तुलसी के पत्तों में एन्टिओक्सीडैंट गुण पाया जाता है तथा आवश्यक तेल और अन्य पोषक पदार्थ पाए जाते हैं जो इन्सुलिन निर्माण में सहायक होते हैं । प्रतिदिन भूखे पेट चार-पांच तुलसी के पत्तों का सेवन करें या एक चम्मच तुलसी का रस पियें । इससे शुगर लेवल कम होता है ।

जामुन (Jambolan) का सेवन करें 

Jambolan in sugar ki bimari
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जामुन भी डायबिटीज को कम करने में हेल्प करता है । इसके लिए काले जामुन को काले नमक के साथ प्रतिदिन सेवन करने से रक्त में शुगर की मात्रा नियंत्रित होती हैं ।

इसके अतिरिक्त जामुन के बीजों का भी सेवन कर सकते हैं । जामुन के बीजों को सुखाकर उसका चूर्ण बना लें और प्रतिदिन भूखे पेट गुनगुने पानी के साथ सेवन करें । इससे शुगर लेवल नियंत्रित हो जाता है ।

प्रतिदिन दालचीनी (Cinnamon) का सेवन करें 

दालचीनी भी शुगर लेवल को नियंत्रित करने में मदद करती है । कम-से-कम एक माह तक लगभग एक ग्राम प्रतिदिन अपने आहार में सेवन करें । मधुमेह में लाभ मिलेगा ।

नीलबदरी (Bilberry or blueberry) का सेवन करें 

ब्लूबेरी में मधुमेह का उपचार करने गुण पाया जाता है । आयुर्वेद के अनुसार नीलबदरी में काफी मात्रा में पोषक तत्व पाए जाते हैं जो शुगर के लेवल को नियंत्रित करता है । इसके साथ ही इसमें चयापचय की प्रक्रिया को सही करने तथा ग्लूकोस को शरीर के सभी भागों पहुँचाने में भी मदद करता है ।

मैथी (Fenugreek) का सेवन करें 

डायबिटीज को कण्ट्रोल करने के लिए मैथी भी लाभदायक होती है । मैथी के दानों को एक रात एक गिलास पानी में भिगोकर रखें । सुबह उठकर खाली पेट उस पानी को पी जाएँ और साथ में दानों को भी खा जाएँ । उसके बाद कम से कम आधे घंटे तक कुछ भी न खाएं । प्रतिदिन नियमित रूप से ऐसा करने पर डायबिटीज कण्ट्रोल हो जाता है । 

जैतून के तेल (Olive oil) का प्रयोग करें

जैतून के तेल का सेवन करने से डायबिटीज ठीक हो जाता है । इसके साथ ही जैतून के तेल से ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides) का लेवल भी कम होता है और यह कोलेस्ट्रोल भी नियंत्रित रहता है । इसका प्रतिदिन नियमित रूप से प्रयोग करने से शुगर नियंत्रित हो जाती है । जैतून का तेल लम्बे समय तक खाने से ह्रदय सम्बंधित बिमारियों से मुक्ति पाई जा सकती है ।

एलोवेरा जूस (Aloe vera juice) का सेवन करें 

आयुर्वेद में मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए एलोवेरा का प्रयोग सदियों से होता आ रहा है । एलोवेरा में फाइटोस्टेरॉल (Phytosterols), ग्लूकोमानन (Glucommanan) एवं हाइड्रोफिलिक फाइबर (Hydrophobic fibers) आदि कई प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं । एलोवेरा का जूस पीने से मधुमेह ठीक हो जाता है तथा रक्त से शुगर लेवल कण्ट्रोल हो जाता है ।

लहसुन (Garlic) का सेवन करें 

आयुर्वेद में लहसुन का प्रयोग औषधि के रूप में सदियों से होता आ रहा है । लहसुन का सेवन करने से भी शुगर नियंत्रित होती है । लहसुन की चार-पांच कलियाँ पूरी रात पानी में भिगोकर रखें और सुबह भूखे पेट खा लें । नियमित रूप से ऐसा करने से डायबिटीज ठीक हो जाता है ।

अमलतास की पत्तियों (Amaltas leaves) का सेवन करें 

अमलतास भी डायबिटीज के उपचार में प्रयोग किया जाता है । अमलतास की पत्तियों को अच्छी तरह धोकर रस निकलकर प्रतिदिन खाली पेट पीने से रक्त से शुगर नियंत्रित होती है ।

अंजीर के पत्तों (Fig leaves) का सेवन करें 

अंजीर के पत्तों में डायबिटीज को ठीक करने का गुण पाया है । प्रतिदिन अंजीर के पत्तों को भूखे पेट चबाने या पानी में उबालकर पानी पीने से शुगर कण्ट्रोल हो जाती है ।

सहिजन के पत्तों (Horseradish leaves) का प्रयोग करें 

सहिजन के पत्तों का सेवन करने से मधुमेह से छुटकारा पाया जा सकता है । सहिजन के पत्तों को खाने से डायबिटीज के रोगियों का पाचन तंत्र ठीक रहता है और हाई बीपी को भी कम करने में मदद करता है ।

º मधुमेह में क्या खाएं और क्या न खाएं (What to eat and what not to eat in Diabetes in Hindi)

मधुमेह के रोगियों का आहार निम्न प्रकार का होना चाहिए –

डायबिटीज में क्या खाना चाहिए ? Diabetes me kya khana chahiye 

  • अमरुद मधुमेह के रोगियों के लिए लाभदायक होता है । इसमें कई प्रकार के विटामिन्स एवं  डायटरी फाइबर (dietary fibre) पाया जाता है । इसमें शुगर कम मात्रा में पाई जाती है ।
  • नाशपाती में भी शुगर कम मात्रा में पाई जाती है । इसमें इसमें भी डायटरी फाइबर एवं विटामिन्स कई मात्रा में उपस्थित होते हैं । आप डायबिटीज में इसका सेवन कर सकते हैं ।
  • जामुन का सेवन करें
  • प्रतिदिन सुबह पूरी रात भिगोकर रखे जौ का पानी पीना चाहिए उसके बाद शुगर फ्री (Sugar free) चाय के साथ में नमकीन बिस्किट खाएं
  • नाश्ते में अंकुरित अनाज एवं फैट फ्री दूध पी सकते हैं । इसके अतिरित बिना तेल के पराठे एवं दही खा सकते हैं या नमक का दलिया खा सकते हैं । आप मूंगफली भी खा सकते हैं ।
  • आप अल्प मात्रा में सेब खा सकते है या आधा केला खा सकते है । आप संतरे का सेवन कर सकते हैं ।

डायबिटीज में क्या नहीं खाना चाहिए (Diabetes me kya nahin khana chahiye)

Diabetes me parhej

कुछ फल ऐसे होते हैं जिनका सेवन डायबिटीज में नहीं करना चाहिए क्यूंकि इनमे शुगर उच्च मात्रा में होती है जैसे – अंगूर, चेरी, अनानास, केला, सूखे मेवे आदि । इनका सेवन करने से शुगर लेवल और बढ़ सकता है ।

इसके अतिरिक्त आलू, चुकुन्दर, शकरकंद, गाजर का सेवन भी नहीं करना चाहिए । इनमे भी अधिक मात्रा में शुगर पाई जाती है । इसके अतिरिक्त मीठे फलों का जूस भी नहीं पीना चाहिए ।

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