नपुंसकता (Erectile Dysfunction) – कारण व घरेलू उपाय

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नपुंसकता जिसे स्तंभन दोष (Erectile dysfunction) भी कहते हैं यह एक प्रकार का यौन सम्बन्धी विकार है। यह पुरुषों में होने वाली बहुत ही ख़राब बीमारी है जिसमें सम्भोग के समय व्यक्ति का लिंग या शिश्न (Penis) खड़ा न होना या उत्तेजित नहीं होता है। यह समस्या पति-पत्नी के लिए गंभीर समस्या उत्पन्न कर सकती है।

यह बीमारी मुख्यतः ह्रदय एवं तंत्रिका तंत्र (nervous system) सम्बंधित बिमारियों, मधुमेह (Diabetes) एवं नशीले पदार्थों के अधिक सेवन के कारण होती है। कई बार स्तम्भन दोष या नपुंसकता मानसिक विचारों एवं अनुभवों के कारण पैदा होती है जिसे मानसिक नपुंसकता (mental erectile dysfunction) कहते हैं।

सामान्य शब्दों में लिंग में पर्याप्त तनाव न आना या तनाव के बाद भी सही तरीके से सम्भोग नहीं कर पाने को इरेक्टाइल डिसफंक्शन कहा जाता है। विशेषकर यह समस्या डायबिटीज के मरीजों में पाई जाती है। कभी-कभी लिंग में उत्तेजना न आना असामान्य (नपुंसकता) नहीं होता है।

कभी-कभी लिंग में उत्तेजना न आने का कारण पुरुषों में तनाव की वजह भी हो सकता है। किन्तु अगर हर बार ऐसा होता है तो फिर आपको किसी अच्छे चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए।

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नपुंसकता क्या है? (What is Erectile dysfunction (Impotence) in Hindi?

Premature ejaculation
Premature ejaculation

Napunsakta kya hai in hindi   Erectile dysfunction kya hota hai 

इरेक्टाइल डिसफंक्शन एक प्रकार का यौन विकार है जिसमे व्यक्ति सेक्स करने के समय अपने लिंग या पेनिस को खड़ा करने असमर्थ होता है। यह पुरुषों में होने वाली बीमारी है। इरेक्टाइल डिसफंक्शन एक ऐसी स्थिति है जिसमे व्यक्ति सम्भोग या सेक्स करने में सफलता प्राप्त नहीं कर पाता है। 

हालाँकि कुछ मामलों में यह समस्या सामान्य हो सकती है जो कभी-कभी हार्मोन की कमी, तनाव या आत्मविश्वास की कमी के कारण आ सकती है। सामान्य यौन गतिविधि के दौरान पूर्ण निर्माण बनाये रखने में असमर्थता को नपुंसकता कहा जाता है। नपुंसकता को स्तम्भन दोष, इम्पोटेंस (Impotence) और इरेक्टाइल डिसफंक्शन भी कहा जाता है।

पुरुष के सम्भोग या सेक्स चक्र में चार चरण होते है – कामेच्छा, लिंग या पेनिस में तनाव, स्त्री जननांग में प्रवेश और चरमोत्कर्ष या ओर्गास्म (orgasm) इनमें से लिंग में पर्याप्त तनाव न आना नपुंसकता कहलाता है। अगर एक भी स्थिति साथ न दे तो बहुत बड़ी समस्या आ सकती है जिसका असर पति-पत्नी के रिश्ते पैर पड़ता है।

और पढ़ें – Shighrapatan (Early discharge) घरेलू उपाय 

नपुंसकता के कारण (Causes of Erectile dysfunction/Impotence in Hindi)

Napunsakta ke karan in hindi 

वैसे स्पर्म्स या शुक्राणु की कमी के कारण इम्पोटेंस या नपुंसकता नहीं आती है। डायबिटीज नपुंसकता का प्रमुख कारण होता है। इसमें व्यक्ति की कामेच्छा और चरम-सुख या स्खलन की अवस्था तो सामान्य होती है किन्तु पेनिस या लिंग में तनाव में कमी आती है। इसलिए डायबिटीज के रोगी को सबसे पहले अपनी शुगर कण्ट्रोल करना चाहिए ताकि इरेक्टाइल डिसफंक्शन की समस्या और न बढे।

अगर शुगर नियंत्रित होने के बाद भी पेनिस में तनाव न आये या पेनिस खड़ा न हो तो आपको किसी अच्छे गुप्त रोग विशेषज्ञ के पास जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त स्तम्भन दोष या नपुंसकता होने के निम्नलिखित कारण होते हैं –

  1. तंत्रिका तंत्र में गड़बड़ी होना
  2. हार्मोन में गड़बड़ी होना
  3. शरीर से रक्तधारा बहना या अधिक मात्रा में रक्त की कमी आना
  4. पेरोनी रोग – इसमें लिंग के अंदर निशान वाले टिश्यू या ऊतक विकसित हो जाते हैं।
  5. शारीरिक एवं मानसिक तनाव
  6. मादक द्रव्यों व नशीली चीजों का सेवन
  7. नींद से सम्बंधित समस्याएं
  8. दवाओं या एंटीबायोटिक्स के दुष्परिणाम
  9. प्रोस्टेट ग्रंथि से सम्बंधित समस्याएं जैसे – प्रोस्टेट कैंसर आदि
  10. पेनिस से सम्बंधित बीमारी
  11. डायबिटीज
  12. ह्रदय रोग
  13. मेटाबोलिक सिंड्रोम
  14. एथेरोस्क्लेरोसिस
  15. पार्किंसंस रोग
  16. रीढ़ की हड्डी या पेल्विक में चोट आना जिसके कारण लिंग या स्तम्भन को उत्तेजित करने वाली नस काट जाती है।
  17. डिप्रेशन
  18. सम्भोग के दौरान अच्छे प्रदर्शन की चिंता
  19. कैंसर
  20. थकान होना
  21. चिंतित होना या मानसिक समस्या से परेशान होना
गंभीर कारण –
  • प्रोस्टेट सर्जरी होना
  • नसों पर चोट लगना
  • हाई बीपी की बीमारी होना
  • सायकोलॉजिकल से सम्बंधित समस्या 
  • लम्बे समय तक शराब जैसी नशीली दवाइयों का सेवन
  • अत्यधिक मोटापा
  • टेस्टोस्टेरोन हार्मोन में गड़बड़ी
  • तंत्रिका तंत्र में गड़बड़ी

नपुंसकता के लक्षण (Symptoms of Erectile Dysfunction in Hindi)

napunsakta in hindi
Erectile dysfunction

Purusho me Napunsakta ke lakshan in Hindi  Napunsakta ke lakshan aur upchar 

नपुंसकता के लक्षणों को जानना बहुत कठिन होता है किन्तु आवश्यक भी होता है। नपुंसकता (Napunsakta) के लक्षण भी कई प्रकार के होते हैं जो कि निम्नलिखित है –

नपुंसकता या बाँझपन के सामान्य लक्षण 

Male infertility symptoms in hindi  Banjhpan ke lakshan in hindi 

  • लिंग या पेनिस में उत्तेजना लाने में परेशानी होना या असमर्थ होना
  • सेक्स या यौन गतिविधियों के दौरान उत्तेजना बनाये रखने में कठिनाई होना
  • सेक्स करने की इच्छा में कमी होना या इच्छा न होना
  • समय से पहले वीर्य निकलना जिसे शीघ्रपतन कहते हैं
  • वीर्य निकलने में देरी होना
  • सम्भोग या सेक्स के दौरान लिंग या पेनिस की कठोरता कम होना
  • आत्मविश्वास की कमी होना। जिसके कारण सेक्स करते समय पुरुषों में डर एवं घबराहट होती है और पेनिस ठीक से खड़ा नहीं होता है।
  • लिंग या पेनिस में पर्याप्त उत्तेजना होने के बाद भी सेक्स करने में समर्थ न होना

बाँझपन (नामर्दी) या नपुंसकता के भावनात्मक लक्षण 

Erectile dysfunction symptoms in hindi   Napunsakta ke symptoms in hindi 

  • शारीरिक सेक्स या सम्भोग करने में रूचि कम होना अथवा रूचि न होना
  • सेक्स या सम्भोग के नाम से शर्म या लज्जा आना
  • सेक्स करने में तनाव या चिंता होना
  • सम्भोग करते समय आत्मविश्वास की कमी होना

नपुंसकता के प्रकार (Types of Impotence/Erectile dysfunction in Hindi)

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नपुंसकता या स्तम्भन दोष की बात करें तो ये दो प्रकार की होती हैं –

प्राथमिक नपुंसकता या स्तम्भन दोष (primary erectile dysfunction or primary impotence)

इस प्रकार की नपुंसकता या बाँझपन में वे लोग या पुरुष आते हैं जो कभी भी स्तम्भन प्राप्त नहीं कर पाते हैं या बनाये नहीं रख पातें हैं अर्थात कभी भी उत्तेजना नहीं बना पाते हैं। प्राथमिक नपुंसकता बहुत जटिल या दुर्लभ स्थिति होती है। इस प्रकार की नपुंसकता या स्तम्भन दोष मानसिक कारणों या शारीरिक विकारों के कारण आती है।

द्वित्तीयक नपुंसकता या बाँझपन या स्तम्भन दोष (secondary erectile dysfunction or secondary impotence)

इसके अंतर्गत वे व्यक्ति आते हैं जो शुरू में तो स्तम्भन या उत्तेजना प्राप्त करने में सक्षम होते हैं किन्तु बाद में अक्षम हो जाते हैं। इस प्रकार के इम्पोटेंस या नपुंसकता को द्वित्तीयक नपुंसकता कहते हैं। द्वित्तीयक नपुंसकता या बाँझपन काफी सामान्य स्थिति होती है। तथा इसकी 90% स्थितियों में कार्बनिक इटीयोलॉजी (organic etiology) होती है।

इसके अतिरिक्त सेकेंडरी से ग्रसित लोग अधिकतर रिएक्टिव साइकोलोजी (Reactive Psycology) उत्पन्न कर लेते हैं। जिसके कारण इस नपुंसकता की समस्या आती है।

नपुंसकता (नामर्दी) से बचाव (Prevention of Erectile dysfunction or Impotence in Hindi)

कई बार लोगों को पता ही नहीं होता है कि उन्हें नपुंसकता किस चीज से हो रही है क्यूंकि कुछ चीजे जो नपुंसकता से जुडी होती है किन्तु आपको उनके बारे में पता ही नहीं होता है। कुछ खाने-पीने की चीजों एवं जीवनशैली में परिवर्तन करके नपुंसकता या मेल इनफर्टिलिटी से बचाव किया जा सकता है। जिसके कारण नपुंसकता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

नपुंसकता या बाँझपन के निम्नलिखित बचाव हो सकते हैं जिनको ध्यान में रखकर पुरुष इस समस्या को सुधार सकते हैं –

तनाव को कम रखें –

इरेक्टाइल डिसफंक्शन में तनाव व अवसाद को कम करें। तनाव ब्लड प्रेशर से जुडी समस्या हो सकती है जो ब्रेन के उन सिग्नलों को प्रभावित कर सकता है जो स्तम्भन करने के लिए मष्तिष्क द्वारा भेजे जाते हैं।

संतुलित आहार का सेवन करें –

स्तम्भन दोष हो चाहे कोई भी समस्या हो हमेशा संतुलित आहार का सेवन करना चाहिए। वैसे कुपोषित होने से नपुंसकता के चांस कम होते है किन्तु संतुलित आहार एवं स्वास्थ भोजन का सेवन न करने पर डायबिटीज व बीपी जैसी समस्या आ सकती है। इन्ही बीमारियों के कारण बाद में स्तम्भन दोष की समस्या आ सकती है।

अपना वजन कम रखें –

जिन लोगों का वजन अधिक होता है उनको भी कभी नपुंसकता या बाँझपन की समस्या आ सकती है। इसलिए हमेशां आपने वजन अपनी उम्र के अकॉर्डिंग ही रखें।

धूम्रपान न करें –

धूम्रपान के कारण कई प्रकार की बीमारियां तो होती ही है तथा यह शरीर के लिए तो बहुत ही नुकसानदायक है। धूम्रपान (Smoking) रक्त पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है जिसके कारण स्तम्भन दोष या नपुंसकता की समस्या होती हैं।

शराब एवं अन्य नशीले पदार्थों का सेवन न करें –

कोई भी नशा स्वास्थ के लिए हानिकारक होता है। शराब एवं कोई भी नशीली चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए। शराब पीने से नपुंसकता पर नकारात्मक या प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

इसके आलावा नपुंसकता में निम्नलिखित बातों का भी ध्यान रखना चाहिए –

  • अधिक तापमान से दूर रहें
  • प्रतिदिन व्यायाम करें
  • टाला हुआ एवं मसालेदार भोजन न करें
  • हमेशां स्ट्रेस एवं टेंशन फ्री रहें

नपुंसकता या स्तम्भन दोष के नुकसान (Complications of Erectile dysfunction in Hindi) 

Napunsakta ke nuksan in Hindi   napunsakta ke desi nuskhe   

नपुंसकता के कारण निम्नलिखित जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है –

  1. आत्मसम्मान की महसूस करना
  2. शर्म या लज्जा महसूस करना
  3. सेक्स जीवन में असंतोष आना
  4. अपनी पत्नी को गर्भवती या प्रग्नेंट करने में समर्थ न होना
  5. चिंता एवं तनाव बढ़ना
  6. रिश्ते या रिलेशनशिप सम्बन्धी समस्याएं होना

नपुंसकता या बाँझपन की जाँच (Diagnosis of Erectile Dysfunction/Impotence in Hindi)

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कई बार लोगों को ये पता ही नही चलता ह्यै कि नपुंसकता या बाँझपन (Male infertility) है या नहीं। ऐसे में आपको डॉक्टर को दिखाना चाहिए। वहां डॉक्टर आपसे कुछ प्रश्न पूंछ सकते हैं या फिर डॉक्टर को लगे कि आपमें कोई अन्तर्निहित समस्या है अथवा दीर्घकालीन स्वास्थ समस्या है तो आपको डॉक्टर निम्नलिखित टेस्ट करवाने के लिए बोल सकते हैं –

शारीरिक परीक्षण(physical examination)

शारीरिक परिक्षण में डॉक्टर आपके लिंग या पेनिस (Penis) और वृषण या टेस्टिस (Testis) की जाँच कर सकते हैं। जिनकी जाँच सावधानीपूर्वक की जाती है। इसके आलावा उत्तेजना की जाँच करने के लिए नसों को चेक किया जाता है। आपके फेफड़ों एवं ह्रदय की आवाजों को सुनकर भी बाँझपन या स्तम्भन दोष का टेस्ट किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त प्रोस्टेट (Prostate gland) की जाँच भी की जा सकती है जिसमे आपके गुदा का परिक्षण (rectal exam) किया जाता है।

मूत्र परीक्षण (Urine test) 

नपुंसकता (Impotence) की जाँच करने के लिए आपके मूत्र का सैंपल लिया जाता है जिसका प्रयोग डायबिटीज या मधुमेह एवं अन्य स्वास्थ सम्बन्धी बीमारियों की जाँच करने के लिए किया जाता है। बीमारी के आधार पर डॉक्टर पता लगाते हैं कि नपुंसकता है या नहीं।

रक्त परिक्षण (Blood test) 

रक्त परीक्षण या ब्लड टेस्ट भी उसी प्रकार किया जाता है जिस प्रकार मूत्र टेस्ट किया जाता है। जिसका इस्तेमाल बीमारियों की जाँच करने के लिए किया जाता है।

साइकोलॉजिकल परीक्षण (Psycological test) 

मनोवैज्ञानिक परीक्षण या साइकोलॉजिकल परीक्षण में आपसे डॉक्टर तनाव या नपुंसकता के अन्य मनोवैज्ञानिक कारणों का पता लगाने के लिए कुछ प्रश्न पूंछ सकते हैं।

अल्ट्रासाउंड-स्कैन (Ultrasound-scan)

अल्ट्रासाउंड जिसे सोनोग्राम (Sonogram) भी कहा जाता है। इसका प्रयोग उच्च आवृत्ति ध्वनि तरंगों (high frequency sound waves) का उपयोग करके शरीर के अंदरूनी हिस्सों की छवि या इमेज तैयार करने के लिए किया जाता है। इस टेस्ट में एक छड़ी जैसे डिवाइस का प्रयोग किया जाता है जिसे ट्रांसड्यूसर (transducer) कहा जाता है।

नपुंसकता की जाँच में इस ट्रान्सडूसर या छड़ी को उस वाहिका के ऊपर फेरा जाता है जो लिंग में उत्तेजना उत्पन्न करने या खून पहुँचाने का कार्य करती है। इस प्रक्रिया में एक चलचित्र छवि या वीडियो तैयार किया जाता है। जिसको डॉक्टर देखने के बाद बीमारी का पता लगते हैं। कई बार इस टेस्ट को लिंग में इंजेक्शन लगाने के साथ किया जाता है। इस इंजेक्शन के कारण लिंग में उत्तेजना उत्पन्न होती है।

नपुंसकता के घरेलू उपचार (Home remedies for Erectile dysfunction/Impotence in Hindi)

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बाँझपन या स्तम्भन दोष या नपुंसकता का इलाज करने के लिए कई सारी दवाइयों का प्रयोग किया जाता है तथा इसका आयुर्वेदिक इलाज भी किया किया जाता है। आयुर्वेद में कई सारे उपाय है जिनको अपनाकर नपुंसकता या इम्पोटेंस का इलाज किया जा सकता है जो निम्नलिखित है –

जामुन की गुठली के चूर्ण का सेवन करें नपुंसकता में 

Erectile dysfunction me jamun ke fayde 

erectile dysfunction
Photo by Artem Beliaikin on Unsplash

इरेक्टाइल डिसफंक्शन या नपुंसकता के घरेलु उपचार या आयुर्वेदिक उपचार में जामुन की गुठली भी फायदेमंद होती है। प्रतिदिन जामुन की गुठली का पाउडर एक गिलास दूध के साथ पिए। यह प्रक्रिया लगातार करने से वीर्य या धातु का नष्ट होना बंद हो जाता है और वीर्य बनना प्रारंभ हो जाता है।

बादाम (Almond) का सेवन करें 

बादाम और मिश्री, कालीमिर्च व सौंठ सभी को पीसकर सभी का चूर्ण बना ले और लगभग 100 ग्राम बादाम के अनुपात में 50 ग्राम मिश्री, 20 ग्राम काली मिर्च एवं 20 ग्राम सौंठ के पाउडर को मिक्स करके एक-एक चम्मच दूध में मिलाकर रोज शाम को सोने से पहले सेवन करने से वीर्य का निर्माण अधिक मात्रा में होता है तथा लिंग से सम्बंधित सारे रोग ख़त्म हो जाते हैं।

नपुंसकता दूर करें लहसुन से 

Erectile dysfunction me Lahsun ke fayde 

Garlic buds in hindi
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लहसुन में एलिसिन नामक तत्त्व पाया जाता है जो शरीर में रक्त प्रवाह को सुधरने का कार्य करता है। इसलिए लहसुन स्तम्भन दोष या नपुंसकता में अच्छी भूमिका निभाता है। प्रतिदिन लहसुन की थोड़ी कलियाँ घी या मक्खन के साथ तलें और सेवन करें।

इसके अलावा आप प्रतिदिन एक चम्मच लहसुन के पावडर के साथ आधा चम्मच मिर्च पाउडर (लाल) मिलाकर सोने से एक घंटा पहले पानी में मिलाकर पियें। प्रतिदिन ऐसा करने से स्तम्भन दोष (erectile dysfunction) में बहुत लाभ मिलेगा।

स्तम्भन दोष या नपुंसकता में लाभकारी है छुहारे 

नपुंसकता (erectile dysfunction) के लिए छुहारे भी फायदेमंद होते हैं। इनका सेवन प्रतिदिन दूध के साथ करने से यौन समस्याओं में बहुत ही लाभ मिलता है। शाम को छुहारे को दूध के साथ इतनी देर तक उबले की वह आधा रह जाये। उसके बाद दूध और छुहारों को खाने से नपुंसकता ठीक होती है। प्रतिदिन इस प्रक्रिया को दोहराने से जल्दी आराम मिलता है। 

इसके अतिरिक्त छुहारे एवं किशमिश को पूरी रात पानी में भिगोकर रखें और सुबह दूध के साथ सेवन करने से भी लाभ मिलता है। 

सफ़ेद कौंच के बीजों का सेवन नपुंसकता में लाभकारी

सफेद कौंच बीज का सीधा प्रयोग सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। अतः इसका सेवन करने से पहले बीजों के छिलके को हटा लेना चाहिए। इसके लिए आप पूरी रात भर कौंच के बीजों को दूध या गौमूत्र में भीगो कर रख दें और सुबह उसके छिलकों को हटा लें। उसके बाद उसे धूप में सूखा दें। सूखने के बाद इसका पाउडर इस्तेमाल करें।

विधि 1 – अब इसके पाउडर को तालमखाना या कोकिलाक्ष और मिश्री का चूर्ण के साथ तीनों को बराबर मात्रा में मिलाकर दूध के साथ एक चम्मच पीने से नामर्दी या नपुंसकता दूर होती है।

विधि 2 – इसके अलावा कौंच के पाउडर को राल तालमखाना के पाउडर में बराबर मात्रा में मिला ले उसके बाद दोनों के मिश्रण के बराबर मिश्री का पाउडर मिला लें। अब इस मिश्रण के दो-दो चम्मच प्रतिदिन एक गिलास दूध के साथ पीने से भी नपुंसकता ठीक होती है।

इरेक्टाइल डिसफंक्शन में शतावरी भी फायदेमंद 

आयुर्वेद में शतावर के कई सारे लाभ बताये गए हैं। मुख्य रूप से जब यौन सम्बन्धी बिमारियों के उपचार की बात आये तो इसमें शतावर का नाम पहले आता है।

विधि 1 – शतावर, अश्वगंधा, इलायची, वंशलोचन एवं कुलंजन सभी के चूर्ण को बराबर मात्रा में मिलाकर एक चम्मच चूर्ण और एक चम्मच शक्कर को एक गिलास में मिलाकर पीने से नपुंसकता या बाँझपन ठीक होता है। यह प्रक्रिया प्रतिदिन दोहराने से कुछ ही महीनों में फर्क दिखने लगता है।

विधि 2 – शतावर को दूध के साथ उबालकर थोड़ी सी मिश्री मिला लें और इसका सेवन करें। प्रतिदिन यह प्रक्रिया करने से दो से तीन माह में नपुंसकता ठीक होने लगती है।

विदारीकन्द (Vidarikand) का चूर्ण लाभदायक स्तम्भन दोष में 

सेक्स सम्बंधित समस्याओं को दूर करने के लिए विदारीकंद का चूर्ण भी लाभकारी होता है। इसके सेवन से प्रौढ़ पुरुष भी नवयुवकों की तरह मैथुन-शक्ति प्राप्त कर सकता है।

विधि – 5 ग्राम विदारीकंद के चूर्ण में 5 ग्राम देश घी व थोड़ी मिश्री तीनों को दूध में मिलाकर पीने से वीर्य वृद्धि होती है और नपुंसकता दूर होती है। यह प्रक्रिया प्रतिदिन दोहराएं।

सफ़ेद प्याज का सेवन करें नामर्दी या नपुंसकता में 

प्याज में कई सारे आयुर्वेदिक गुण पाए जाते है। इसमें कामोत्तेजक गुण भी पाया जाता है तथा वीर्य या सीमेन नाश को रोककर वीर्य बढ़ाने का कार्य करता है।

विधि 1 – 8 मिलीलीटर सफ़ेद प्याज का रस, 6 मिलीलीटर अदरक का रस तथा तीन ग्राम देशी घी और 4 ग्राम शहद को मिलाकर प्रतिदिन खाने से स्तम्भन दोष या नपुंसकता ठीक हो जाती है। यह प्रक्रिया लगभग एक से दो माह तक रोज दोहराएं।

विधि 2 – दो लीटर सफ़ेद प्याज के रस में 1 किलो शहद मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं जब तक केवल शहद ही न रह जाये उसके बाद उसमें आधा किलो सफ़ेद मूसली का चूर्ण अच्छी तरह मिलाकर कांच या चीनी के बर्तन में रख दें। सुबह शाम 20-20 ग्राम प्रतिदिन इसका सेवन करने से नपुंसकता या बाँझपन ठीक हो जाती है।

विधि 3 – दो सफ़ेद प्याज को काटकर टुकड़े कर मख्खन के साथ धीमी आंच पर तब तक सेकें जब तक कि प्याज के टुकड़े भूरे न पड़ जाये। इनको प्रतिदिन खाना खाने से पहले शहद के साथ खाने से नपुंसकता में लाभ मिलता है। इसके अतिरिक्त बारीक़ कटे हुए प्याज को गर्म पानी में आधे घंटे तक डालकर रखें उसके बाद उस पानी को प्रतिदिन दिन में तीन बार पी सकते हैं।

जायफल के चूर्ण का सेवन करें नामर्दी या नपुंसकता में 

विधि 1 – जायफल भी नपुंसकता या इरेक्टाइल डिसफंक्शन में लाभदायक होता है। लगभग आधा ग्राम जायफल का चूर्ण एक गिलास पानी के साथ मिलाकर प्रतिदिन शाम को पिए। इसे एक से डेढ़ महीने तक करने से नपुंसकता (Erectile dysfunction in hindi) आराम मिलेगा तथा मैथुन की कमजोरी और धातु या वीर्य की कमी दूर होगी।

विधि 2 – एक चौथाई चम्मच जायफल के चूर्ण को एक चम्मच शहद के साथ प्रतिदिन सुबह शाम सेवन करें नपुंसकता में सुधर होगा।

इसके आलावा जायफल के तेल को सरसों के तेल के साथ मिलाकर लिंग या शिश्न पर प्रतिदिन मालिश करें।

जामुन की गुठली का चूर्ण का सेवन करें नपुंसकता में 

इरेक्टाइल डिसफंक्शन या नपुंसकता के घरेलु उपचार या आयुर्वेदिक उपचार में जामुन की गुठली भी फायदेमंद होती है। प्रतिदिन जामुन की गुठली का पाउडर एक गिलास दूध के साथ पिए। यह प्रक्रिया लगातार करने से वीर्य या धातु का नष्ट होना बंद हो जाता है और वीर्य बनना प्रारंभ हो जाता है।

अश्वगंधा (Ashwagandha) से दूर करें स्तम्भन दोष या नपुंसकता 

Napunsakta me Ashwagandha ke fayde 

ashwagandha for impotence
Photo by Bankim Desai on Unsplash

अश्वगंधा का सेवन करने से यौन संबंधी कई लाभ होते हैं । इसके सेवन करने से वात दोष भी संतुलित होते हैं और शीघ्रपतन में भी लाभ मिलता है । अश्वगंधा के सेवन से सेक्स उत्तेजना भी बढ़ती है और इससे नपुंसकता (Infertility) दूर होती है। इसका सेवन प्रतिदिन शहद या पानी के साथ में कर सकते हैं।

अकरकरा (Akarkara) का चूर्ण खाएं नपुंसकता में 

इरेक्टाइल डिसफंक्शन को ठीक करने के लिए अकरकारा भी फायदेमंद होता है । इसके अलावा अकरकरा जननांगों में रक्त संचार को बढ़ाता है और नपुंसकता को कम करता है। यह पुरुषों में कामोत्तेजक को बढ़ाता है तथा स्पर्म की संख्या और प्रजनन क्षमता को भी बढ़ाता है । अकरकारा लिंग की मसल्स को मजबूत बनाता है और वीर्य को निकलने से रोकता है।

गिलोय भी फायदेमंद नपुंसकता में 

आंवला, गिलोय व बड़ा गोखरू तीनों के चूर्ण को बराबर मात्रा में मिलाकर एक चम्मच प्रतिदिन मिश्री व देसी घी के साथ डेढ़ से दो माह तक लगातार खाने से नपुंसकता या बाँझपन दूर होती है और प्रबल इच्छा शक्ति विकसित होती है।

बेल के पत्तों का रस पियें नामर्दी या नपुंसकता में 

नपुंसकता की समस्या होने पर बेल के पत्तों का रस भी लाभकारी होता है।

विधि 1 – 20 एम एल बेल के पत्तों के रस में 10 ग्राम मिश्री पाउडर व 5 ग्राम सफ़ेद जीरा पाउडर मिलाकर प्रतिदिन खाने व ऊपर से दूध पिने से नपुंसकता व शरीर की कमजोरी दूर होती है।

विधि 2 – बेल के पत्तों के रास में शहद मिलाकर लिंग या शिश्न या पेनिस पर मालिश करने से नपुंसकता में लाभ होगा

नपुंसकता होने पर सफेद मूसली (White Muesli) का सेवन करें

सफेद मूसली का सेवन करने से शीघ्रपतन भी ठीक होता है। इसमें अनगिनत औषधीय गुण पाए जाते हैं जो यौन समस्याओं मुख्या रूप से नपुंसकता को दूर करती है। सफेद मूसली का सेवन करने से वीर्य गाढ़ा बनता है और शुक्राणुओं (Sperm) की संख्या को भी बढ़ाती है। यह वीर्य की मात्रा और शुद्धता में भी सुधार करती है।

स्तम्भन दोष में केला (Banana) एवं खजूर (Dates) का सेवन करें

प्रतिदिन एक पका हुआ केला और 100 ग्राम खजूर खाएं। इसके बाद मिश्री युक्त दूध का सेवन करें। इससे वृषण (Testis) में वीर्य अधिक बनता है और सेक्स करने की उत्तेजना भी बढ़ती है। ऐसा दो से तीन माह तक करने से नपुंसकता की बीमारी ठीक होती है और शीघ्रपतन में भी लाभ होता है।

सेमल के पेड़ की छाल का सेवन करें नपुंसकता या नामर्दी में 

नपुंसकता को ठीक करणे के लिए सेमल के पेड़ का प्रयोग भी आयुर्वेद में किया जाता है। सेमल के पेड़ में बहुत सारे औषधीय गुण पाए जाते हैं। यह नपुंसकता के साथ-साथ शीघ्रपतन जैसी यौन सम्बंधित बिमारियों को ठीक करने के काम आता है।

विधि 1 – सेमल के पेड़ की छाल के 20 मिलीलीटर रस में मिश्री मिलाकर सेवन करने से नपुंसकता में लाभ मिलता है। प्रतिदिन इसे करने पर वीर्य वृद्धि एवं मैथुन शक्ति में वृद्धि होती है।

विधि 2 – इसके अलावा 10 ग्राम सेमल के चूर्ण में 20 ग्राम चीनी व 100 मिलीलीटर पीने के पानी में मिलाकर प्रतिदिन पीने से नपुंसकता या इम्पोटेंस दूर होती है और साथ ही साथ मैथुन शक्ति या बाजीकरण में भी वृद्धि होती है।

चने का सेवन करें नपुंसकता में 

चने में भी सेक्स सम्बंधित बिमारियों को ठीक करने का गुण पाया जाता है और वीर्य या धातु वृद्धि भी करता है। प्रतिदिन शुबह शाम भीगे चने खाएं उसके बाद बादाम की गिरी खाने से नपुंसकता दूर होती है और मैथुन शक्ति व वीर्य भी बढ़ता है।

नपुंसकता होने पर गाजर का सेवन करें 

गाजर में बहुत प्रकार के आयुर्वेदिक गुण पाएं जाते हैं। प्रतिदिन गाजर का जूस लगातार पिने से नपुंसकता ठीक होती है साथ ही साथ मैथुन शक्ति और आँखों की रौशनी भी बढ़ती है। इसके आलावा रोज 100 ग्राम गाजर का हलवा खा सकते हैं।

तरबूज के बीजों की गिरी का सेवन करें इम्पोटेंस या नपुंसकता में 

प्रतिदिन तरबूज के बीजों की गिरी में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर खाएं और ऊपर से दूघ पिने से नपुंसकता में लाभ मिलता है।

नोट :- बेहतर परिणाम के लिए अच्छे आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।

योग से करें नपुंसकता का उपचार (Yoga to cure Erectile Dysfunction in Hindi)

पैल्विक फ्लोर मांसपेशी व्यायाम करके नपुंसकता को ठीक कर सकते हैं। सबसे पहले अपने पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को पहचाने इसके लिए जब आप पेशाब करते समय एकदम बीच में रोकते है तो जिन मांसपेशियों का प्रयोग होता है वे पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां होती हे। जब आप इन मांसपेशियों को सिकोड़ते हैं तो आपके अंडकोष ऊपर उठ जाते हैं।

इस प्रकार जब आपको पता चल जाता की पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां कहाँ है तो उन्हें 15 से 20 सेकंड के लिए सिकोड़े और फिर सामान्य छोड़ दें। ऐसा प्रतिदिन दिन में चार बार करें और प्रत्येक बार इसे 10 से 20 बार दोहराएं। इस व्यायाम को करने से नामर्दी या नपुंसकता में बहुत ही लाभ मिलता है।

नपुंसकता या इरेक्टाइल डिसफंक्शन को ठीक किया जा सकता है या नहीं (Is Erectile dysfunction cureble or not in Hindi? )

नपुंसकता या इम्पोटेंस का उपचार कई कारकों पर निर्भर करता है। कुछ परिस्थितियों में इसका उपचार किया जा सकता है। इसके लिए रोगी की स्थिति व जीवनशैली को देखा जाता है। नपुंसकता के रोगी को डॉक्टर के परामर्श पर अपने आहार में और जीवनशैली में परिवर्तन करना।

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