डेंगू क्या है ? डेंगू के घरेलू उपाय, लक्षण, कारण, प्रकार और बचाव बताइए

डेंगू (Dengue) एक प्रकार का बुखार है जिसे सामान्य रूप से हड्डीतोड़ बुखार (Brake bone fever) के नाम से भी जाना जाता है। यह एक ऐसी बीमारी है जो डेंगू वायरस के कारण होती है जिसका वाहक एडीज मच्छर (Aedes mosquito) होता है ।

जब संक्रमित मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो उस व्यक्ति को डेंगू (Dengue) हो जाता है । यह बीमारी प्रमुख रूप से मच्छरों के काटने से होती है इसलिए इनसे बचना चाहिए ।

कई सारे लोग मच्छरों से बचने के लिए कई सारे उपाय भी करते हैं ।  किन्तु कभी-कभी मनुष्य से मच्छरों को भी डेंगू बुखार हो सकता है । जब कोई एडीज मच्छर किसी संक्रमित मानव को काट लेता है तो डेंगू वायरस मानव से मच्छर में चला जाता है ।

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डेंगू बुखार क्या होता है ? (What is Dengue fever in Hindi ?)

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Dengue kya hota hai in hindi

डेंगू एक प्रकार बुखार होता है जो डेंगू वायरस के कारण होता है जिसका वाहक (carrier) एडीज एजिप्टी (Aedes aegypti) मच्छर के कारण होता है । मच्छर के एक बार काटने मात्र से भी मानव डेंगू वायरस से संक्रमित हो सकता है ।

डेंगू बुखार होने पर व्यक्ति को तेज सिरदर्द (headache) होता है तथा हाथ-पैरों में इतना दर्द होता है जैसे हड्डियाँ ही टूट गयी हो इस कारण इसे हड्डीतोड़ बुखार (Brakebone fever) भी कहते हैं ।

इसे रक्तस्त्रावी बुखार (hemorrhagic fever) भी कहते हैं जिसके कारण रक्तवाहिनियों में रक्तस्त्राव (bleeding) अथवा रक्त का रिसाव होता है तथा प्लेटलेट्स (platelets) जिसके कारण रक्त जमता है, की संख्या में कमी आती है ।

डेंगू एक शॉक सिंड्रोम (shock syndrome) है जिसमें मरीज का रक्तचाप (Blood pressure) एकदम कम हो जाता है और रोगी सदमे (shock) में चला जाता है तथा शरीर के कई अंगों में रक्त का संचार कम हो जाता है ।

डेंगू का इतिहास (History of Dengue) 

डेंगू बुखार का पहला वर्णन सन 1779 में किया गया था तथा 20 वी शताब्दी आते-आते वैज्ञानिकों ने यह ज्ञात किया कि डेंगू बुखार एक वायरस के कारण होता है जिसे बाद में डेंगू वायरस का नाम दिया गया । यह वायरस मच्छरों के कारण संचारित होता है ।

17 वी शताब्दी के लिखित दस्तावेजों में भी एक ऐसी महामारी का वर्णन मिलता है जो डेंगू हो सकती है । डेंगू महामारी की आरंभिक रिपोर्ट सन 1779-80 की है । उस समय डेंगू ने अफ्रीका, एशिया तथा उत्तरी अमेरिका को अपनी चपेट में लिया था । 

सन 1906 में वैज्ञानिकों ने यह खोज निकाला की डेंगू का संक्रमण एडीज (Aedes) मच्छरों से होता है तथा 1907 में यह सिद्ध किया कि डेंगू बुखार एक वायरस के कारण होता है । दूसरे विश्वयुद्ध (Second world war) के पश्चात् डेंगू महामारी तेजी से फैलने लगी । इसका कारण वैज्ञानिकों ने युद्ध से हुए पर्यावरण प्रदुषण को माना । इसके कारण भिन्न-भिन्न प्रकार के डेंगू नए-नए क्षेत्रों में फैले

सन् 1953 में पहली बार लोगों को पहली बार रक्तस्त्रावी डेंगू बुखार होना प्रारंभ हो गया जिसका वर्णन सबसे पहले फिलिपिन्स की रिपोर्ट में किया गया । सन् 1970 तक आते-आते रक्तस्त्रावी डेंगू बुखार बच्चों में मृत्यु का प्रमुख कारण बन गया । 

डेंगू के लक्षण (Symptoms of Dengue in Hindi)

डेंगू बुखार आने पर रोगी में निम्नलिखित लक्षण दिखाई देते है –

  • तेज सिरदर्द होना
  • प्लेटलेट्स की संख्या का लगातार कम होना
  • तेज बुखार आना (कभी-कभी ठण्ड के साथ बुखार आता है )
  • जोड़ों और मांसपेशियों में तेज दर्द होना
  • थकान आना
  • मितली या उलटी आना
  • त्वचा पे लाल या गुलाबी चकते जमना
  • भूख न लगना
  • आँखों के पीछे तेज दर्द होना तथा आँखों का लाल होना
  • रक्तचाप (Blood pressure) का अचानक कम होना और हृदयगति का कम होना 
  • ठण्ड लगना

ये लक्षण शुरुआत में दिखाई देते है 6-7 दिनों के पश्चात् डेंगू के लक्षण गंभीर हो जाते है जैसे –

  • उल्टी के साथ में खून आना
  • पेशाब से खून आना
  • मसूड़ों और नाक से खून निकलना
  • शरीर में सभी तरल पदार्थों का जम जाना
  • साँस लेने में दिक्कत होना
  • पेट में तेज दर्द होना
  • सुस्ती और बेचैनी महसूस होना
  • यकृत (Liver) में समस्या होना
  • कान तथा पुरे शरीर से रक्तस्त्राव (Bleeding) होना

डेंगू होने के कारण (Causes of Dengue fever in Hindi)

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Dengue hone ke kya karan hote hain ?

डेंगू (Dengue) होने का मुख्य कारण डेंगू वायरस होता है जिसका वाहक (Carrier) एडीज मच्छर (Aedes mosquito) होता है । डेंगू वायरस (Dengue virus) चार प्रकार के होते हैं –

  1. DEN-1
  2. DEN-2
  3. DEN-3
  4. DEN-4

इनमे से DEN-2 और DEN-4 वायरस कम खतरनाक होता है जबकि DEN-1 और DEN-3 उन दोनों की तुलना में अधिक खतरनाक होता है । डेंगू वायरस को डेन वायरस (Den virus) भी कहा जाता है । 

डेंगू बुखार संक्रामक रोग नहीं है तथा यह सीधे एक व्यक्ति से दुसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है । यह बीमारी तब फैलती है जब कोई मच्छर डेंगू से संक्रमित व्यक्ति को काट लेता है तो डेंगू वायरस मच्छर के शरीर में प्रवेश कर जाता है और जब संक्रमित मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काट लेता है तो उस व्यक्ति को भी डेंगू हो जाता है । इस प्रकार यह बीमारी मानव से मच्छर और मच्छर से मानव में फैलती है ।

व्यक्ति के संक्रमित होने के बाद डेंगू वायरस 2 से 7 दिनों तक संक्रमित व्यक्ति के रक्त में रहता है और यदि इस समय कोई एडीज मच्छर काट लेता है तो वह मच्छर भी संक्रमित हो जाता है और जब यह मच्छर किसी दुसरे व्यक्ति को काटता है तो उसे भी संक्रमित कर देता है ।

जब किसी व्यक्ति को डेंगू बुखार हो जाता है तो जिस वायरस से वह संक्रमित होता है उसी विशिष्ट वायरस से प्रतिरक्षित हो जाता है किन्तु अन्य तीन प्रकार के वायरसों से नहीं । यदि आप तीन या चार बार डेंगू वायरस से संक्रमित हो जाते हैं तो आपको गंभीर डेंगू बुखार अर्थात् रक्तस्रावी बुखार (hemorrhagic fever) होने की सभावना बढ़ जाती है ।

डेंगू के प्रकार (Types of Dengue in Hindi) 

डेंगू कितने प्रकार का होता है ? Dengue kitne prakar ka hota

डेंगू बुखार तीन प्रकार का होता है –

साधारण या क्लासिकल डेंगू बुखार (Normal Dengue Fever)

इस प्रकार के डेंगू बुखार में रोगी सरलता से ठीक हो जाता है तथा इसमें व्यक्ति की मृत्यु नहीं होती है । इसमें व्यक्ति को ५-७ दिनों तक बुखार रहता है । क्लासिकल डेंगू बुखार के लक्षण भी सामान्य होते हैं ।

ठण्ड के साथ तेज बुखार आना, सिरदर्द होना, मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द होना, आँखों के पिछले भाग एवं हाथ लगाने पर दर्द होना, भूख न लगना, कमजोरी तथा जी मचलना, गले में दर्द होना, मुह का स्वाद बिगड़ना आदि साधारण डेंगू बुखार के लक्षण हैं ।

डेंगू हैमरेजिक बुखार (Dengue Hemorrhagic Fever, DHF)

यह भी डेंगू का एक प्रकार है किन्तु इसके लक्षण क्लासिकल डेंगू बुखार के लक्षणों थोड़े और अधिक होते हैं । इसमें रोगी के शरीर से आंतरिक या बाहरी रक्तस्त्राव शुरू हो जाता है । यह रोगी के लिए बहुत खतरनाक स्थिति होती है । इसे डीइचएफ (DHF) भी कहा जाता है ।

त्वचा पे गहरे काले-पीले रंग के चकते पड़ना, नाक से खून निकलना, दांतों व मसूड़ों से रक्त निकलना, मूत्र के साथ रक्त आना, उल्टी के साथ रक्त आना आदि रक्तस्त्रावी डेंगू (Dengue Hemorrhagic Fever, DHF) के लक्षण है ।

डेंगू शॉक सिंड्रोम (Dengue Shock Syndrome, DSS)

इस प्रकार के डेंगू में DHF यानि रक्तस्त्रावी डेंगू के लक्षणों के अतिरिक्त शॉक अर्थात झटके की स्थिति भी पैदा हो जाती है । जब DHF अधिक गंभीर हो जाता है तो डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS) हो जाता है जो DHF से अधिक खतरनाक और गंभीर होता है ।

डीएसएस के लक्षणों में रोगी धीरे-धीरे होश खोने लगता है, ठण्ड लगना और बुखार तेज होना, रोगी का बैचेन होना, नाड़ी का तेज होना, रक्तचाप कम होना, ह्रदय की गति में परिवर्तन होना, बदन दर्द होना एवं होंठ नीले पड़ना डेंगू शॉक सिंड्रोम (Dengue Shock Syndrome, DSS) के लक्षण हैं ।

डेंगू से बचाव (Prevention of Dengue fever in Hindi)

Dengue se kaise bachen ? डेंगू से कैसे बचें ? 

डेंगू से बचाव के उपाय निम्नलिखित है –

  • डेंगू से बचने के लिए अपने घर तथा आसपास पानी को ढंककर रखें तथा पानी को इकठ्ठा न होने दें
  • डेंगू बुखार मच्छर से फैलता है इसलिए मच्छरों को पनपने से रोकें तथा मच्छरों को भगाने वाली क्रीम एवं अगरबत्ती का प्रयोग करें
  • समय-समय पर घर एवं उसके आसपास की अच्छे से सफाई करें एवं कूलर टंकी की सफाई करें ।
  • अधिक पानी पियें और अपने शरीर में लिक्विड की मात्रा को बढ़ाएं इसके लिए जूस का सेवन करें ।
  • ऐसे कपड़े पहने जिनसे पूरा शरीर ढँक जये
  • डेंगू के मच्छर पानी में ही पनपते है इनको नष्ट करने के लिए पानी के सभी स्त्रोतों को ढंककर रखें तथा जिन स्त्रोतों को ढंकना संभव नहीं है उनको सप्ताह में एक बार साफ अवश्य करें और पानी के बड़े स्त्रोतों में गम्बुसिया मछली छोड़ देनी चाहिए । ये मछली मच्छरों में लार्वा को खा जाती है ।

डेंगू के घरेलू उपचार (Home remedies for Dengue fever in Hindi)

डेंगू के घरेलू उपचार निम्नलिखित हैं –

पपीते की पत्तियों (Papaya leaves) का ज्यूस पियें

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पपीते के पत्ते डेंगू बुखार में बहुत ही लाभप्रद होते है । पपीते की पत्तियों (Papaya leaves) में कार्बनिक यौगिक बहुत अधिक मात्रा में पाए जाते है तथा इनमे पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं जो रक्त में प्लेटलेट्स (Platelets) की संख्या बढ़ता हैं । पत्तियों का ज्यूस बनाने के लिए सबसे पहले पपीते की पत्तियों को मिक्सर में अच्छी तरह पीसें उसके बाद उसमे थोडा सा शहद मिलाएं । इस मिश्रण को प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से डेंगू में लाभ मिलता हैं ।

गिलोय एवं तुलसी का काढ़ा पिए

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गिलोय (Giloy) बुखार के लिए  बहुत ही महत्वपूर्ण औषधि (Drug) हैं । यह प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) को मजबूत बनाये रखने व शरीर को संक्रमण से बचाने का कार्य करता है । इसके लिए दस ग्राम गिलोय और दस पन्द्रह तुलसी के पत्तो को मिलाकर तीन कप पानी में उबालकर काढ़ा (decoction) बनाये और प्रतिदिन सेवन करने से डेंगू बुखार में आराम मिलता हैं । 

नारियल पानी (Coconut water) का सेवन करें

Photo by Taryn Elliott from Pexels
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डेंगू बुखार में नारियल पानी (coconut water) भी बड़ी भूमिका निभाता है । नारियल पानी में बहुत सारे पोषक तत्व जैसे कि मिनरल्स एवं इलेक्ट्रोलाइट्स (Electrolytes)आदि पाए जाते हैं जो शरीर को ताकतवर (Strong) बनता हैं । नारियल का पानी पीने से डेंगू में जल्दी से आराम मिल जाता है।

नीम (Neem) के पत्तों के रस का सेवन करें 

Photo by Madhav Malleda on Unsplash
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नीम के पत्तों (Neem leaves) के रस में भी डेंगू बुखार को ठीक करने का गुण पाया जाता हैं । नीम के पत्तों का रस पीने से खून में सफ़ेद रक्त कोशिकाओं की संख्या बढती हैं तथा प्लेटलेट्स काउंट (Platelets count) भी बढ़ता हैं । साथ ही नीम के पत्तों का रस पीने से प्रतिरक्षा तंत्र भी मजबूत होता हैं । डेंगू के मरीज को प्रतिदिन नीम के पत्तो का रस सुबह-शाम एक-एक गिलास पिलाना चाहिए ।

चुकुन्दर (Beetroot) का रस पियें 

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चुकुन्दर का रस भी प्लेटलेट्स की संख्या (Platelets count) बढ़ाने में मददगार साबित होता हैं । चुकुन्दर में कई मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) गुण पाया जाता हैं जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ता हैं । चुकुन्दर का रस प्रतिदीन सुबह शाम डेंगू के रोगी को पिलाना चाहिए ।

जौ (Barley) का सेवन करे 

डेंगू बुखार को ठीक करने के लिए जौ का सेवन भी लाभकारी होता हैं क्यूंकि यह प्लेटलेट्स  की संख्या को बढ़ाता हैं तथा रक्त में कोशिकाओं के निर्माण को भी बढाता हैं । इसके लिए आप जौ का हलवा या काढ़ा बनाकर मरीज को पिला सकते हैं ।

मेथीदाना (Fenugreek seeds) का सेवन करे 

मेथीदाना का सेवन भी बुखार को कम करने में सहायक होता हैं तथा ये दर्द से भी आराम दिलाता हैं । मेथीदाना का सेवन करने के लिए इसे रातभर पीने के पानी में भिगोकर रखे और सुबह उठकर इसके पानी का प्रतिदिन सेवन करे इससे डेंगू के कारण आया हुआ बुखार उतर जाता  हैं ।

कद्दू का रस (Pumpkin juice) पिएं 

कद्दू के रस को पीने से भी डेंगू बुखार ठीक होता हैं । इसका सेवन करने के लिए पक्के हुए कद्दू को पीसकर उसका रस बनाये तथा उसमे थोड़ा सा शहद मिलाएं तथा मरीज को पिलायें ।

संतरे के रस (Orange juice) का सेवन करें 

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संतरे के रस में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी पाया जाता हैं तथा इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी पाया जाता हैं जो वायरस को नष्ट करने का कार्य करता है । साथ ही यह डेंगू बुखार को भी ठीक करता हैं । संतरे का रस पीने से शरीर को उर्जा मिलती हैं तथा यह प्रतिरक्षा तंत्र को भी मजबूत बनाता हैं । संतरे का रस रोज सुबह-शाम मरीज को एक-एक गिलास पिलायें ।

हल्दीवाला दूध (Turmeric milk) पियें 

हल्दी में बहुत सारे औषधीय गुण पाए जाते हैं तथा ये मेटाबोलिज्म को बढ़ाने का काम भी करती हैं । हल्दी में करक्यूमिन (Curcumin) नामक पदार्थ पाया जाता हैं जो डेंगू वायरस को फैलने से रोकता है । हल्दी का इस्तेमाल करने के लिए शाम को एक गिलास दूध में एक चम्मच हल्दी पावडर मिलाकर पीने से डेंगू में लाभ मिलता हैं ।

एलोवेरा (Aloe vera) का सेवन करें 

एलोवेरा में बहुत सारी बिमारियों को ठीक करने का गुण पाया जाता हैं । एक गिलास पानी में तीन चम्मच एलोवेरा का रस मिलाकर पीने से डेंगू बुखार में राहत मिलती हैं ।

डेंगू बुखार में जीवनशैली एवं खानपान 

डेंगू बुखार में रोगी का खानपान एवं जीवनशैली निम्नलिखित प्रकार की होनी चाहिए –

  • डेंगू के रोगी को डिहाइड्रेशन की समस्या आ जाती है जिसके चलते उसका मुंह एवं गला सूख जाता है। इसके लिए आपको फलों का जूस, सूप एवं नारियल पानी आदि तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।
  • डेंगू के रोगी शरीर में प्रोटीन की कमी भी आती है जिसकी पूर्ति के लिए मरीज को दूध एवं दुग्ध उत्पादों का सेवन करना चाहिए। इसके लिए ऊंट का दूध (हांड का दूध) सबसे अच्छा उपाय है।
  • डेंगू होने पर गाजर, चुकुंदर, खीरा एवं हरी पत्तेदार सब्जियों का रस पीना चाहिए। इनमें भरपूर मात्रा में विटामिंस एवं खनिज लवण (Minerals) पाए जाते हैं जो डेंगू के मरीज को ऊर्जा प्रदान करता है।
  • डेंगू के मरीज को नींबू पानी का सेवन करना चाहिए। नींबू पानी पीने से रोगी के शरीर में तत्काल एनर्जी आती है और यह शरीर की आंतरिक सफाई भी करता है।
  • डेंगू में हर्बल चाय भी फायदेमंद होती है। हर्बल टी में अदरक और इलायची मिलाकर सेवन करें।
  • जौ एवं गेहूं के दलिए का सेवन करें। इसमें पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व एवं फाइबर (Fiber) पाया जाता है जो मरीज को ऊर्जा प्रदान करता है।
  • अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए। इससे शरीर में निर्जलीकरण की समस्या दूर होती है।

डेंगू बुखार में परहेज (Avoid in Dengue fever)

डेंगू बुखार में क्या क्या परहेज करना चाहिए ?

डेंगू बुखार में पेट से संबंधित समस्याएं जैसे गैस बनना आदि। इसलिए तेलयुक्त मसालेदार एवं तली हुई चीजों से परहेज रखना चाहिए।

हमेशा हल्का एवं पचने योग्य भोजन ही करना चाहिए साथ ही शाकाहारी (Herbivore) भोजन ही करना चाहिए। मांसाहार (Carnivore) से बचना चाहिए। मांस में बहुत सारे विषाक्त तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को बीमार कर सकते हैं। इसलिए हमेशा शाकाहार अपनाना चाहिए।

डेंगू से जुड़े प्रश्न-उत्तर (Questions and answers related to Dengue in Hindi)

क्या बिना बुखार आए भी डेंगू हो सकता है ?

डेंगू में बुखार आना आवश्यक नहीं है। बिना बुखार आए भी डेंगू हो सकता है । इस तरह के डेंगू को एफेब्रिल डेंगू कहते हैं।

डेंगू का मच्छर कैसा होता है ?

डेंगू का मच्छर जिसे एडीज मच्छर कहते हैं यह मच्छर सामान्य मच्छर से अलग तरह का होता है। इस मच्छर के शरीर पे धारियां बनी होती है। यह मच्छर प्रायः रोशनी में ही काटता है।

एक-दूसरे में कैसे फैलता है डेंगू ?

डेंगू बुखार सीधे एक-दूसरे में नहीं फैलता है। जब डेंगू से पीड़ित व्यक्ति को एडीज मच्छर काटता है तो वो मच्छर भी डेंगू से संक्रमित हो जाता है। जब संक्रमित मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काट लेता है तो उसके रक्त में डेंगू वायरस प्रवेश हो जाता है। इस प्रकार डेंगू एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है।

डेंगू से खतरा कब बढ़ जाता है ?

जब डेंगू वायरस से संक्रमित होने के बाद उसका समय पर उपचार नहीं किया जाए तो रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या में कमी आने लगती है। साथ ही मरीज की हालत गंभीर होने लगती है। जब प्लेटलेट्स काउंट बहुत ही कम हो जाता है तो इस स्थिति में रोगी को रक्त की आवश्यकता होती है और समय पर रक्त नहीं दिया गया तो रोगी की मृत्यु भी हो सकती है।

 

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