कब्ज़ क्या है ? कब्ज़ के घरेलु उपाय, लक्षण, कारण क्या है ? kabz ka ilaj

कब्ज़ (Constipation)क ऐसी अवस्था है जिसमे किसी जीव का मल सूख जाता है जिसके कारण उसे मल (Stool) त्यागते समय बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है । इसमें मरीज का पेट ठीक से साफ नहीं होता है और मल कठोर होने के कारण मल त्यागते समय बहुत अधिक जोर लगाना पड़ता है तथा बार-बार लेट्रिन जाना पड़ता है । एक सप्ताह में कम से कम 7 बार मल त्यागना सामान्य होता है किन्तु चार बार से कम मल त्यागने पर कब्ज की समस्या इत्पन्न हो जाती है जिसके कारण कई तरह की परेशानियाँ झेलनी पड़ती है ।

कब्ज़ के कारण पेट में गैस बनने लगती है तथा पेट में दर्द होने लगता है जिसके कारण पेट में कई प्रकार की समस्याएं होने लगती है । कब्ज़ के कारण रोगी को पूरा दिन आलस्य रहता है और कार्य करने में मन नहीं लगता है तथा कुछ भी खाने से पहले बहुत सोचना पड़ता पड़ता है ।

अधिक दिनों तक कब्ज़ की समस्या बनी रहने पर कई प्रकार की बीमारियाँ होने की शंका रहती है इसलिए कब्ज़ की समस्या होने पर तुरंत इसका उपचार कराएँ । कब्ज़ का उपचार करने के लिए कई प्रकार के घरेलु उपचार उपलब्ध है जिनकी सहायता से बड़ी ही सरलता से कब्ज़ का उपचार किया जा सकता है । नीचे कई सारे घरेलु उपचार बताये गए है जिन्हें अपनाकर आप कब्ज़ का आसानी से उपचार कर सकते हैं ।

 

 

कब्ज़ (Constipation) क्या है ? (What is Constipation in Hindi)

कब्ज kya hai in hindi ?

कब्ज पाचनतंत्र से सम्बंधित वह स्तिथि है जिसमे किसी जीव का मल कठोर हो जाता है जिसके कारण उसको मल त्यागते समय बहुत कठिनाई होती है । हमारे शरीर का संतुलन वात, कफ, पित्त आदि दोषों पे निर्भर करता है ।इन दोषों में असंतुलन होने पर हमारे शरीर में कई सारी बीमारियाँ उत्पन्न हो जाती है । इनमें से वात दोष में असंतुलन के कारण कब्ज़ की समस्या होती है । कब्ज की समस्या हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है । कब्ज की समस्या किसी को कुछ समय के लिए होती है तो किसी के लिए लम्बे समय के लिए समस्या बन जाती है । कब्ज से किसी को गैस की समस्या होती है तो किसी को पेट दर्द होता है और किसी का पाचन ठीक से नहीं हो पाता है ।

 

कब्ज के लक्षण (Symptoms of Constipation in Hindi)

कब्ज के क्या-क्या लक्षण होते हैं ? Kabj ke lakshan in Hindi

कब्ज एक ऐसी समस्या है जिसमें मल त्यागने में कठिनाई होती है तथा कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कब्ज होने के कई लक्षण होते है । कब्ज़ होने के संकेत या लक्षण निम्नलिखित है-

  • कब्ज होने से  मल त्यागते समय परेशानी होती है
  • कब्ज होने के कारण मुंह में छाले हो जाते हैं
  • कब्ज से पीड़ित व्यक्ति की जीभ मैली एवं सफ़ेद हो जाती है तथा मुंह से बदबू आने लगती है । इसके साथ ही मुंह का स्वाद भी ख़राब लगता है ।
  • कब्ज होने पर मल से पानी अवशोषित हो जाता है जिसके कारण मल अत्यधिक कठोर हो जाता है और मल त्यागते समय वह छोटी-छोटी गांठ के रूप में बहार निकलता है ।
  • कब्ज होने से पेट में दर्द होने लगता है अथवा सूजन रहती है तथा पेट में भारीपन महसूस होता है ।
  • कब्ज के रोगी को हमेशा गैस की समस्या रहती है
  • कब्ज होने पर रोगी को भूख कम लगती है
  • कब्ज के कारण रोगी को उबकाई आती है तथा उलटी होने जैसा महसूस होता है ।
  • कब्ज से पीड़ित व्यक्ति के गालों या त्वचा पर छोटी-छोटी फुंसियां या मुहासे होने की भी सम्भावना रहती है
  • मलाशय पूर्ण रूप से साफ नहीं होता है जिसे साफ करने के लिए मल त्यागते समय पेट को दबाना पड़ता है या फिर उँगलियों का प्रयोग करना पड़ता है
  • एक सप्ताह में चार से कम बार मल त्यागने पर कब्ज की समस्या और बढ़ जाती है जिससे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है
  • कब्ज होने पर रोगी को बिना कार्य किये ही थकान लगने जैसा महसूस होता है तथा पूरा दिन आलस्य बना रहता है
  • कब्ज के रोगी की पिंडलियों में दर्द होने की भी सम्भावना रहती है

कब्ज के कारण (Causes of Constipation in Hindi)

कब्ज होने के क्या कारण है ? Kabj hone ke kya karan hai ?

कब्ज होने के कई कारण होते हैं । शरीर में भोजन से जल को अवशोषित करने का कार्य बड़ी आंत (Large Intestine) का कार्य होता है । ऐसे में जब मल बड़ी आंत में अधिक समय तक ठहरता है तो मल का सभी जल अवशोषित हो जाता है जिसके कारण मल कठोर हो जाता है । मल कठोर होने के कारण व्यक्ति को कब्ज की समस्या हो जाती है।

कब्ज होने के कारण निम्नलिखित है-

  • तले हुए एवं मसालेदार चीजों का सेवन करने के कारण कब्ज की समस्या हो जाती है तथा मैदे से बनी वस्तुओं का सेवन करने के कारण भी कब्ज हो सकता है
  • भोजन में रेशेदार अर्थात फाइबर युक्त आहार की कमी होने के कारण कब्ज हो जाता है
  • अधिक मात्रा में मांस एवं पनीर (Cheeze) का सेवन करने से भी कब्ज की समस्या हो जाती है
  • शरीर में पानी की कमी अर्थात निर्जलीकरण (dehydration) होने के कारण मल कठोर हो जाता है जिसके कारण कब्ज की समस्या बढ़ जाती है
  • मल का त्याग करने में लापरवाही बरतने के कारण कब्ज की समस्या हो जाती है क्यूंकि ऐसा करने से मल अधिक समय तक बड़ी आंत में ठहरता है जिसके कारण मल कठोर हो जाता है और कब्ज की समस्या हो जाती है
  • तरल पदार्थों का सेवन कम करने के कारण भी कब्ज की समस्या हो सकती है
  • कब्ज होने का एक कारण समय पर भोजन नहीं करना या फिर रात्रि में देरी से भोजन करना भी है। इसके अतिरिक्त रात्रि में अधिक देर तक जागना
  • जिस व्यक्ति को थाइरोइड की समस्या होती है उसे भी कब्ज की समस्या रहती है
  • अंग्रेजी दवाइयों विशेषकर दर्द नाशक तथा कैल्शियम युक्त दवाइयों के अधिक प्रयोग से भी कब्ज की स्तिथि रह सकती है
  • बड़ी आंत और मलाशय की समस्याओं जैसे कि इरीटेबल बोवेल सिंड्रोम (Irritable bowel syndrome ,IBS) के कारण भी कब्ज जैसी समस्या हो सकती है
  • अधिक मात्रा में चाय और कॉफी का प्रयोग करना
  • तम्बाकू या बीड़ी-सिगरेट का अधिक मात्रा में प्रयोग करने से भी कब्ज की शिकायत हो सकती है

 

Image from pixabay
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कब्ज से बचाव (Prevention of Constipation in Hindi)

कब्ज़ से कैसे बचा जा सकता है ? Kabz se kaise bacha ja sakta hai in hindi 

कब्ज़ से बचाव या रोकथाम के लिए निम्नलिखित उपाय करना चाहिए –

  1. गर्म तरल युक्त पदार्थों का सेवन करें
  2. फाइबर युक्त पदार्थों जैसे- फल, हरी सब्जियां, फलियाँ, अनाज आदि का अधिक सेवन करें
  3. कैफीन युक्त पदार्थों जैसे- चाय, कॉफ़ी आदि का सेवन कम से कम करें
  4. उन पदार्थों का सेवन कम करें जिनमे कम रेशा अर्थात कम फाइबर होता है
  5. शरीर में निर्जलीकरण अर्थात पानी की कमी ना होने दें
  6. मांस एवं डेयरी पदार्थों का प्रयोग कम करे और हो सके तो मांस का त्याग कर दें
  7. प्रतिदिन व्यायाम करें
  8. मल त्याग या शोच करने में लापरवाही ना करें
  9. हमेशा तनावमुक्त रहने की कोशिश करे

कब्ज़ का परिक्षण (Diagnosis of Constipation in Hindi)

कब्ज़ का परिक्षण कैसे करते है ? kabz ka parikshan kaise karte hain in hindi 

कब्ज़  का परिक्षण या निदान करने के लिए निम्नलिखित टेस्ट किये जा सकते हैं –

  1. आपके पेट का एक्स-रे करके यह पता लगाया जा सकता है की आपकी आंतो में कितना कढ़ा या कठोर मल है
  2. डेफिकोग्राफी टेस्ट करके यह पता लगाया जा सकता है की आपका मलाशय या आंते ठीक से कार्य कर रही है या नहीं
  3. डेफिकोग्राफी के अतिरिक्त बेरियम एनीमा टेस्ट से भी आपके मलाशय या आँतों का टेस्ट कर सकते है
  4. एमआरआई (मेग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग) डेफिकोग्राफी द्वारा मल त्यागने की गतिविधि का अध्ययन करना ।
  5. खून की जाँच में कैल्शियम एवं थाइरोइड हार्मोन का टेस्ट करके कब्ज का अध्ययन किया जा सकता है

कब्ज़ के नुकसान (Complications of Constipation in Hindi)

कब्ज़ से होने वाले नुकसान के है ? Kabz se hone wale nuksan in hindi 

कब्ज़ होना ही अपने आप में शरीर के लिए नुकसान ही है परन्तु कब्ज़ होने के बाद भी इससे कई प्रकार के नुकसान हो सकते हैं जो निम्नलिखित है –

  • बार-बार कब्ज़ होने के कारण मल कठोर एवं सूख जाता है जिसके कारण वह मल आँतों में फंस सकता है ।
  • कब्ज़ होने पर मल त्यागते समय अधिक जोर लगाने से गुदा में और गुदा की नशों में सूजन आ सकती है तथा बवासीर (Piles) भी हो सकता है
  • मल त्यागते समय अधिक जोर लगाने के कारण कभी-कभी मलाशय गुदा द्वार से बहार आ सकता है जिससे रेक्टल प्रोलेप्स (Rectal Prolapse) हो सकता है
  • सूखे एवं कठोर मल के कारण अधिक दबाव लगाने से गुदा फटने का डर हो सकता है।

कब्ज़ के घरेलु उपाय (Home remedies for Constipation in Hindi)

कब्ज़ के घरेलु उपचार क्या-क्या हैं ? kabz ke gharelu upchar in hindi 

कब्ज़ के घरेलु उपाय निम्नलिखित है-

१. अजवाइन और जीरे से दूर करें कब्ज़

अजवाइन एवं जीरे को तवे में कम फ्लेम पे भून कर दोनों को अच्छी तरह पीस लें । इसके बाद इसमें समान अनुपात में काले नमक को पाउडर के साथ मिलाकर प्रतिदिन एक छोटा चम्मच गुनगुने पानी के साथ सेवन करें । इससे कब्ज़ की समस्या ठीक हो जाती है ।

२. गुड़ और मुलेठी से दूर होता है कब्ज़

सबसे पहले मुलेठी को बारीक़ पीसकर उसका चूर्ण मिला लें । इसके बाद एक गिलास शुद्ध पानी में एक चम्मच गुड़ एवं एक चम्मच मुलेठी चूर्ण को समान अनुपात में मिलाकर सेवन करने से कब्ज़ ठीक हो जाता है ।

३. चने एवं जीरे के प्रयोग से दूर करें कब्ज़

चने का प्रयोग करके कब्ज़ को ठीक किया जा सकता है । सबसे पहले शाम को चने को भिगोकर रख दें उसको सुबह साफ पानी से धोकर जीरे या सौंठ के पाउडर के साथ सेवन करने से कब्ज़ की समस्या ठीक हो जाती है ।

४. नीम्बू और अदरक की चाय

 

Image by Leon_Ting from Pixabay
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नीम्बू स्वास्थ के लिए बहुत अच्छा होता है तथा पाचन तंत्र को मजबूती प्रदान करता है । नीम्बू शरीर में विटामिन सी के लेवल को भी बढाता है । इसके साथ ही अदरक में भी कई तरह के औषधीय गुण पाए जाते है । नीम्बू के साथ अदरक एवं पुदीने की चाय पीने से कब्ज़ की समस्या ठीक हो जाती है ।

इसके अतिरिक्त नीम्बू पानी का सेवन करने से भी कब्ज़ की समस्या ठीक होती है

५. भोजन के साथ दही-छाछ खाएं

जिन लोगों को कब्ज़ की शिकायत रहती है वो प्रतिदिन भोजन के साथ में दही या छाछ (मट्ठे) का भी सेवन कर सकते है । दही में बहुत सारे बैक्टीरिया पाए जाते है जिन्हें गुड बैक्टीरिया कहा जाता है । ये बैक्टीरिया शरीर की आँतों में पाए जाने वाले बेड बैक्टीरिया से लड़ते है और आँतों को स्वस्थ रखते हैं

६. पालक का सेवन करें दूर होगा कब्ज़

पालक में भरपूर मात्रा में आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम आदि खनिज तत्व पाए जाते है । पालक कब्ज़ को ठीक करने में भी सक्षम होता है । पालक का सेवन करने से कब्ज़ ठीक हो जाता है ।

७. शहद से  ठीक होगा कब्ज़

कब्ज़ को ठीक करने के लिए शहद का भी प्रयोग किया जा सकता है । शहद को रोज रात को सोने से पहले एक गिलास गुनगुने (अगर ठण्ड का मौसम हो तो अन्यथा ठन्डे पानी में ) पानी में मिलाकर पीने से कब्ज़ की समस्या ठीक हो जाती है ।

 

 

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