साइनोसाइटिस क्या है? साइनोसाइटिस के लक्षण, कारण, प्रकार, परीक्षण, बचाव व घरेलू उपचार क्या है?

हैलो फ्रेंड्स,

आज हम जानेंगे कि साइनोसाइटिस क्या होता है? और इसका उपचार किस प्रकार किया जाता है। साथ ही साइनोसाइटिस के कौन-कौनसे लक्षण होते हैं तथा इसके क्या-क्या कारण होते हैं। इसके अतिरिक्त साइनोसाइटिस का परीक्षण कैसे किया जाता है और इसके क्या-क्या बचाव होते हैं। तो चलिए शुरु करते हैं

साइनोसाइटिस को जानने से पहले ये जानना आवश्यक है कि साइनस क्या होता है? क्यूंकि साइनस को जानने से पहले आप साइनोसाइटिस को आप ठीक से नहीं जान सकते हैं। तो फिर बात आती है कि साइनस क्या है? साइनस हमारे चेहरे पर नाक के आस पास की हड्डियों के अंदर जो वायु युक्त जो रिक्त स्थान पाए जाते है उनको साइनस कहा जाता है।

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° साइनस (Sinus) क्या है?

साइनस (Sinus):- हमारे नाक के आसपास मुखड़े या चेहरे की अस्थियों (Bones) के अंदर नमी युक्त हवा/वायु के जो रिक्त स्थान पाए जाते हैं उनको साइनस या वायुविवर (Sinus) कहा जाता है।

ये साइनस वायु या हवा से भरी छोटी-छोटी खोखली गुहा के समान संरचनाएं हाेती हैं जो नाक (Nose) के आसपास, दोनो आंखों के बीच के भाग तथा माथे (Forehead) व गाल की हड्डी के पीछे पाई जाती है। माथे में पाए जाने वाले साइनस को फ्रंटल साइनस (Frontal Sinus), चेहरे के दोनो तरफ हड्डी के नीचे वाले साइनस को मैक्सीलेरी साइनस (Maxileri sinus), आंखों के पास वाले साइनस को एथमॉइड साइनस (Ethmoid Sinus) और पिछले हिस्से में बोचों बीच दिमाग से सटे साइनस को स्फेनॉइड साइनस (Sphenoid Sinus) कहा जाता है।

° साइनोसाइटिस (Sinusitis) क्या है?

अब साइनस को जानने के बाद सवाल आता है कि साइनोसाइटिस क्या होता है? साइनोसाइटिस एक बीमारी है जो साइनस में वायरस या बैक्टीरिया संक्रमण के कारण होती है। साइनस पर श्लेष्मा झिल्ली (mucous membrane) की एक परत होती है जैसे कि मुंह और नाक में होती है। जब किसी व्यक्ति को एलर्जी या सर्दी-जुकाम होता है तो साइनस के अंदर साइनस टिश्यू अधिक श्लेष्म बनाते हैं जिसके कारण साइनस में सूजन आ जाती है और नाक अवरुद्ध हो जाती है। इस रोग को साइनोसाइटिस (Sinusitis) कहते हैं।

साइनोसाइटिस नाक का रोग है जिसे आयुर्वेद में प्रतिश्याय कहते हैं जिसका हिंदी में मतलब होता है सर्दी-जुकाम या पीनस रोग। इस रोग में नाक में बहुत अधिक कफ जमा हो जाता है जिसके कारण नाक बंद हो जाता है तथा सांस लेने में परेशानी होने लगती है। ठंड के दिनों में सिरदर्द होना, नाक टपकना, हल्का-हल्का बुखार आना, आंखों में दर्द होना आदि इसके लक्षण हैं। इसके साथ ही चेहरे पर सूजन आ जाती है और निराशा तथा तनाव बढ़ता है। हमेशा गले (Throat) एवं नाक (nose) में कफ जमा रहता है। यह रोग संक्रमण (Infection) के कारण होता है तथा धूल एवं धुएं से रोगी को सख्त एलर्जी रहती है। देखने में तो यह रोग सामान्य जैसा है परंतु इसका समय पर उपचार नहीं किया गया तो यह रोग गंभीर रूप ले सकता है तथा ‘दुष्ट प्रतिश्याय’ में बदल सकता है जो बहुत खतरनाक होता है। इस रोग से आगे चलकर कई अन्य बीमारियां भी हो सकती है। कई बार नाक के अंदर की हड्डी बढ़ जाती है अथवा एक तरफ़ या तिरछी हो जाती है जिससे सांस लेने में समस्या आने लगती है। जब ऐसे मरीज़ के नाक में ठंडी हवा, धूल या धुआं उस हड्डी से टकराता है तो रोगी को घबराहट होने लगती है।

जब किसी व्यक्ति को साइनस संक्रमण (Sinus infection) होता है तो साइनस की श्लेष्मा झिल्ली में सूजन आ जाती है। इस सूजन के कारण साइनस में हवा या वायु के स्थान पर बलगम अथवा मवाद (Cough) भर जाता है जिससे साइनस के छिद्र बंद हो जाते हैं जिसके कारण सांस लेने में परेशानी, माथे, गालों एवं ऊपरी जबड़े (Appar jaw) में दर्द होने लगता है।

यह साइनोसाइटिस प्रारंभ में सामान्य सर्दी-जुकाम के रूप में शुरु होता है और फिर धीरे-धीरे बैक्टीरियल, वायरल या फंगल इन्फेक्शन के रूप में विकसित हो जाता है। यह रोग तीन सप्ताह से सात-आठ सप्ताह के मध्य होने पर ‘एक्यूट’ (Acute) साइनोसाइटिस तथा आठ सप्ताह से अधिक होने पर ‘क्रोनिक’ (Chronic) साइनोसाइटिस कहलाती है। हर साल लगभग 30% लोग इस बीमारी के चपेट में आ जाते हैं।

° साइनोसाइटिस के प्रकार (Types of Sinusitis in Hindi)

साइनोसाइटिस के निम्नलिखित प्रकार होते हैं:-

१. तीव्र साइनोसाइटिस (Acute Sinusitis/Acute sinus infection)

यह साइनोसाइटिस का वह प्रकार जो दो-चार सप्ताह तक रहता है। दो सप्ताह तक रहने के बाद यह अपने आप ठीक हो जाता है। इसके लक्षण अचानक शुरु होते हैं तथा साइनोसाइटिस का यह प्रकार दो-चार सप्ताह तक रहता है।

२. मध्यम या कम तीव्र साइनोसाइटिस (Sub Acute Sinusitis)

मध्यम या कम तीव्र साइनोसाइटिस में साइनस के सूजन का प्रभाव चार सप्ताह से 12-13 सप्ताह तक रहता है। इसका संक्रमण एक माह से अधिक रहता है किंतु तीन माह से अधिक नहीं रहता है। तीन माह से अधिक रहने पर यह क्रोनिक साइनोसाइटिस में परिवर्तित हो जाता है।

३. जीर्ण साइनोसाइटिस (Chronic sinusitis)

यह लम्बे समय तक रहने वाला साइनस संक्रमण है। इसका प्रभाव तीन माह से अधिक रहता है। क्रोनिक साइनोसाइटिस को निम्नलिखित भागों में बांटा जा सकता है-

  • एलर्जिक फंगल (Allergic fungal) साइनस इन्फेक्शन
  • नाक में कणों (Polyps) के साथ अथवा उनके बिना वाला साइनस इन्फेक्शन

४. आवर्तक साइनोसाइटिस (Recurrent sinusitis)

इस प्रकार के साइनस इन्फेक्शन में बार-बार साइनोसाइटिस होता है। अर्थात यह बार-बार होने वाला साइनस इन्फेक्शन है । इस प्रकार के साइनोसाइटिस में संक्रमण का प्रभाव प्रतिवर्ष कई बार होता है ।

° साइनोसाइटिस के लक्षण (Symptoms of Sinusitis in Hindi)

साइनोसाइटिस के कई लक्षण होते हैं जो कि निन्मलिखित है-

१. सूंघने की कमी

जिस व्यक्ति को साइनोसाइटिस हो जाता है उसको किसी भी चीज़ को सूंघने परेशानी होने लगती है । अर्थात किसी व्यक्ति को साइनस इन्फेक्शन होने पर उसमे सूंघने की कमी आ जाती है ।

२. थकान एवं बुखार

साइनोसाइटिस का एक लक्षण यह है की जिस व्यक्ति को साइनोसाइटिस हो जाता है वह व्यक्ति हर समय थकान महसूस करता है तथा उसको बुखार आती रहती है ।

३. गले में खराश

साइनोसाइटिस होने पर रोगी के गले में हर समय खराश रहती है । वह हर समय खांसता रहता है तथा रोगी हमेशा गले में कुछ अटकने के जैसा महसूस करता है । रोगी को खांसी बनी रहती है।

४. नाक बहना तथा बंद रहना

साइनोसाइटिस होने पर रोगी का नाक हर समय बंद रहता है अर्थात उसे नाक से सांस लेने में भी परेशानी होती है । इसके अतिरिक्त कभी-कभी रोगी का नाक बहने लगता है ।

५. साइनस के स्थान पर दर्द होना

साइनोसाइटिस होने पर रोगी को साइनस के स्थान पर दबाने पर दर्द होता है।

६. नाक से कफ निकलना

साइनोसाइटिस का एक लक्षण यह है कि जब किसी व्यक्ति को साइनस इंफेक्शन होता है तो उसके नाक से पीला, सफ़द या हरा रंग का बलगम या मवाद निकलता है।

७. दांतों तथा कानों में दर्द होना

साइनोसाइटिस होने पर रोगी के दांतों में हमेशा हल्का-हल्का दर्द बना रहता है। रोगी के कानों में भी दर्द होता है।

८. सिरदर्द होना

साइनोसाइटिस होने पर रोगी को सिरदर्द की समस्या बनी रहती है।

९. चेहरे में ढीलापन

साइनोसाइटिस होने पर रोगी के चेहरे पर हमेशा ढीलापन रहता है और रोगी हमेशा सुस्त रहता है।

१०. आंखों में दर्द होना

साइनोसाइटिस के मरीज को आंखों में तथा आंखों के पीछे बहुत दर्द होता है।

° साइनोसाइटिस होने के कारण (Causes of Sinusitis in Hindi)

साइनोसाइटिस होने के कई कारण होते हैं। साइनोसाइटिस के कारण निम्नलिखित है –

१. प्रदूषण (Pollution)

साइनोसाइटिस होने का एक बड़ा कारण प्रदूषण है। साइनोसाइटिस की समस्या ज्यादातर उन्ही लोगों को होती है जो प्रदूषित इलाकों में रहते हैं या फिर काम करते हैं। प्रदूषित हवा, धूल के कण आदि नाक से होकर स्वांस नली में पहुंच जाते हैं और नाक में सर्दी-जुकाम का कारण बनते हैं जिससे बाद में साइनोसाइटिस हो जाता है।

२. जीवाणु (Bacteria)

बैक्टीरिया या जीवाणु सांस के साथ में नाक में प्रवेश कर जाते हैं और सर्दी-जुकाम तथा बलगम पैदा करते हैं

३. विषाणु (Virus)

वयस्कों में होने वाला साइनोसाइटिस अधिकतर विषाणुओं के कारण ही होता है। ये वायरस रोगी के नाक में पहुंचकर साइनस इंफेक्शन का कारण बनते हैं।

४. कवक संक्रमण (Fungal infection)

कवक हवा से सांस के साथ श्वांस नलिका में पहुंचकर नाक में संक्रमण फैलते हैं और साइनसाइटिस का कारण बनते हैं।

५. सर्दी-जुकाम

साइनोसाइटिस का सबसे सामान्य कारण सर्दी-जुकाम ही है। सर्दी-जुकाम के कारण नाक हमेशा बंद रहती है। किसके कारण सांस लेने में परेशानी आने लगती है।

६. एलर्जी (Allergy)

जब किसी व्यक्ति को धूल,धुएं,परागकण, लकड़ी का बुरादा या किसी चीज की एलर्जी होती है तो यह साइनस इंफेक्शन होने का कारण होता है। इसके अतिरिक्त जानवरों के अवशेष जैसे- जानवरों के बाल आदि की एलर्जी होती है।

७. नाक की हड्डी बढ़ना

साइनोसाइटिस होने का सबसे प्रमुख कारण नाक की हड्डी बढ़ना है। हमारे नाक में एक हड्डी होती है जो नाक को दो भागों में बांटती है।

नाक की हड्डी बढ़ने से नाक की नली बंद हो जाती है जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। इसके अतिरिक्त जब कभी नाक पर चोट लग जाती है या दब जाती है तो नाक की हड्डी एक तरफ़ मुड़ जाती है जिससे नाक बंद हो जाता है और साइनोसाइटिस की समस्या हो जाती है।

८. दमा (Asthma)

दमा भी एक श्वांस संबंधी बीमारी है। इसमें रोगी की सांस फूलने लगती है। जिस व्यक्ति को दमा की परेशानी होती है उसे साइनोसाइटिस होने की आशंका बढ़ जाती है।

° साइनोसाइटिस से बचाव (Prevention of Sinusitis in Hindi)

साइनोसाइटिस होने से बचने के लिए हमें कई बातों को ध्यान में रखना चाहिए। साइनस इंफेक्शन से बचने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए –

१. नाक एवं चेहरे को साफ़ रखें

साइनोसाइटिस का बचाव स्वच्छता (Sanitation) से ही किया जा सकता है। अपने नाक को बार-बार साफ़ करें और चेहरे को भी साफ़ रखें। इसके साथ ही खाना या कोई भी चीज खाने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह धोएं।

२. भाप या नेजल स्प्रे (Nasel sprey)

साइनोसाइटिस से बचाव करने के लिए आप दिन में दो से चार बार भाप लें। इसके अतिरिक्त किसी अच्छे नेजल स्प्रे का प्रयोग करें। भाप लेने से बंद नाक खुल जाती है और बलगम या मवाद (Cough) बाहर निकल जाता है जिससे बंद नाक खुल जाती है।

३. प्रदूषण (Pollution) और धूम्रपान (Smoking) से दूर रहें।

साइनस इंफेक्शन से बचने हेतु प्रदूषण से रहें। जिन लोगों को साइनोसाइटिस की समस्या होती है वो स्मोकिंग तथा प्रदूषण दूर रहें। प्रदूषण के कारण साइनस की समस्या बढ़ती है। साइनोसाइटिस होने पर धूम्रपान, शराब आदि नशीली चीजों से हमेशा दूर रहना चाहिए।

४. ठंडी और खट्टी चीजों से दूर रहें

साइनोसाइटिस से बचने के लिए हमेशा ठंडी एवं खट्टी चीजों से दूर रहें। खट्टे और ठंडे पदार्थों के सेवन करने से साइनोसाइटिस अधिक बढ़ जाता है। इनके अतिरिक्त तले हुए एवं कच्चे पदार्थों से भी दूर रहें।

५. एलर्जी एवं सर्दी-जुकाम से बचें

साइनोसाइटिस नाक के संक्रमण से होता है। इससे बचने के लिए सर्दी-जुकाम से बचें। इसके अलावा अगर आपको किसी चीज़ से एलर्जी हो तो उस एलर्जी से भी बचने का प्रयास करें।

 

इन सभी बातों के अलावा साइनोसाइटिस के निम्नलिखित बचाब हो सकते हैं –

  • हमेशा स्वच्छ वातावरण में रहें
  • अपने नाक को हमेशा स्वच्छ रखें
  • कच्ची तथा तैलीय चीजों का सेवन न करें
  • प्रतिदिन व्यायाम करें।
  • स्वसन तन्त्र को किसी भी संक्रमण से बचाएं

 

° साइनोसाइटिस का परीक्षण (Diagnosis of Sinusitis in Hindi)

आपको साइनोसाइटिस है या नहीं इसका परीक्षण कई प्रकार से किया जाता है। साइनोसाइटिस की पहचान करने के लिए कई सारी सुविधाएं उपलब्ध है जैसे- एक्स-रे, एमआरआई (MRI), सीटी स्कैन (CT scan) आदि। किंतु कुछ लक्षणों के आधार पर भी साइनोसाइटिस का परीक्षण किया जा सकता है। ये लक्षण निम्न है –

  1. आपके नाक में सूजन है या नहीं के द्वारा आपके साइनोसाइटिस की जांच की जाती है
  2. यदि आपके गले में खराश हो या आवाज़ में बदलाव हो तो आपको साइनस इंफेक्शन हो सकता है
  3. फाइबर ऑप्टिक स्कोप (Fiber Optic Scope) द्वारा साइनोसाइटिस का परीक्षण
  4. आपके नाक या आंखों में दर्द हो तो साइनोसाइटिस हो सकता है
  5. आपको हमेशा सर्दी-जुकाम रहता है
  6. रात में सोते समय सांस लेने में परेशानी होना
  7. ज्यादा देर बात करने पर गले में दर्द होना आदि

° साइनोसाइटिस का उपचार (Treatment of Sinusitis in Hindi)

साइनोसाइटिस का इलाज कैसे किया जाता है?

साइनोसाइटिस या एलर्जिक राइनाइटिस एक प्रकार का एलर्जी से होने वाला रोग है जिसका पूर्ण रूप से उपचार किया भी जा सकता है और नहीं भी किया जा सकता है किंतु साइनोसाइटिस पैदा करने वाले कारणों से बचाव करके तथा कुछ घरेलू उपचारों से इसके संक्रमण को कम किया जा सकता है।

साइनोसाइटिस के घरेलू उपचार निम्नलिखित है –

१. नमक के पानी से गरारे करें।

साइनोसाइटिस के संक्रमण को कम करने के लिए नमक के पानी से गरारे करना भी लाभकारी होता है। रोज एक गिलास गुनगुना पानी में एक चम्मच नमक मिलाकर रात को सोने से पहले गरारे करें।  ऐसा करने से गले की खराश दूर होती है और साइनोसाइटिस के कारण आई गले की सूजन भी ठीक होती है।

२. गर्म पानी से भाप लें

साइनोसाइटिस के उपचार में गर्म पानी से भाप लेना भी लाभकारी होता है। गर्म पानी से भाप लेने से नासिका के अंदर भरा हुआ बलगम (Cough) पिघलकर बाहर निकल जाता है और बंद नाक खुल जाती है।

३. कालीमिर्च (Black pepper), जीरा (Cumin) और शहद (Honey) का पेस्ट

साइनोसाइटिस के उपाय के लिए कालीमिर्च और जीरे का पेस्ट भी फायदेमंद होता है। पेस्ट बनाने के लिए आपको 2 चम्मच जीरा, 5से6 कालीमिर्च और एक चम्मच शहद की आवश्यकता होगी। सबसे पहले आपको जीरे और कालीमिर्च को एक-एक करके सेक लें और इसके बाद दोनों को अच्छे से पीसकर उसमें शहद मिलाएं और तीनों को अच्छी तरह मिलाकर खाना खाने के बाद दिन में दो या तीन बार सेवन करें । इसमें आप ध्यान रखें कि इसका सेवन करने के बाद आधे घंटे तक पानी न पिएं और अगर पानी पीना है तो गर्म पानी पिए।

४. नींबू और शहद का रस

नींबू और शहद के रस का सेवन करने से साइनोसाइटिस को ठीक किया जा सकता है। इसके लिए आपको एक गिलास गुनगुने पानी में एक नींबू का रस मिलाएं तत्पश्चात एक चम्मच शहद मिलाकर रोज सुबह खाली पेट पिएं । नींबू के रस में साइनोसाइटिस को दूर करने के गुण पाए जाते हैं।

साइनोसाइटिस का योग और आयुर्वेद में क्या उपचार है?

साइनोसाइटिस को रोकने के लिए योग में कई सारे उपाय है जिनको अपनाकर आप साइनोसाइटिस को ठीक कर सकते हैं । साइनोसाइटिस को ठीक करने के लिए आप योग और आयुर्वेद में निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं –

  • भस्त्रिका प्राणायाम
  • कपालभांति प्राणायाम
  • अनुलोम-विलोम प्राणायाम
  • जल नेति क्रिया
  • सूत्रनेति क्रिया

साइनोसाइटिस होने पर डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

जब साइनोसाइटिस कई दिनों से ठीक नही हो रहा हो या घरेलू उपचारों से साइनोसाइटिस ठीक नहीं हो रहा है तो ऐसी स्थिति में आपको किसी अच्छे साइनोसाइटिस के डॉक्टर को दिखाने चहिए।

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